वायु प्रदूषण के मद्देनजर दिल्ली में मालवाहक वाहनों के प्रतिबंध पर लागू के अंतिम दिन तक 6202 वाहनों की जांच की गई और 2271 वाहनों को दिल्ली में प्रवेश से रोका गया। सोमवार को इसका अंतिम दिन था और ट्रैफिक पुलिस ने आठ नवंबर से सोमवार की दरम्यानी रात तक 3931 वाहनों को राजधानी में प्रवेश करने दिया जबकि 2271 को रोक दिया। दिल्ली में गुरुवार से लेकर सोमवार तक पांच दिन यह पाबंदी रही। यातायात के संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार के मुताबिक, गुरुवार रात को 1453 वाहनों की जांच की गई और आवश्यक सामान लेकर आ रहे 1008 वाहनों को प्रवेश दिया गया और 445 गाड़ियां लौटाई गर्इं। इसी प्रकार शुक्रवार को 1559 वाहनों की जांच की गई और 1078 वाहनों को प्रवेश दिया गया जबकि 481 को रोका गया। शनिवार को 1283 गाड़ियों की जांच की गई जिसमें 674 को प्रवेश की अनुमति दी गई और 609 को रोका गया। रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात तक 1907 वाहनों की जांच की गई जिसमें 1171 गाड़ियों को जाने दिया गया जबकि 736 को रोक दिया गया। दिल्ली सरकार ने गुरुवार को प्रदूषण के कारण भारी और मध्यम मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसमें निजी डीजल कार वाहन मालिकों से इस अवधि के दौरान अपने वाहनों का इस्तेमाल नहीं करने की अपील भी की गई थी। सब्जी, फल, अनाज, दूध, बर्फ और अन्य आवश्यक वस्तुओं वाले वाहनों व पेट्रोलियम उत्पाद लेकर आने वाले टैंकरों को प्रतिबंध से छूट दी गई थी।
ट्रैफिक पुलिस ने आठ नवंबर से सोमवार की दरम्यानी रात तक 3931 वाहनों को ही राजधानी में प्रवेश करने दिया। निर्माण गतिविधियों की जांच के लिए उतरेंगी संयुक्त टीमें: प्रदूषण स्तर में कमी लाने के लिए निर्माण गतिविधियों पर निगरानी और सख्त होगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने राजस्व, निगम व सिविल डिफेंस की एक टीम बनेगी। इसके लिए दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने आदेश दिए हैं। उन्होंने सभी विभागों को ऐसे गतिविधियों के खिलाफ सख्ती से पहल करने के आदेश दिए हैं।
इसके अतिरिक्त स्थानीय निकायों को आदेश दिए गए हैं कि वे रोड साइट पर खुले में पड़े निर्माण सामग्री डालने वालों पर भी सख्त कार्रवाई करें। यदि कहीं पर ऐसी सामग्री है तो उसके आसपास पानी का छिड़काव किया जाए।
उन्होंने मुख्य सचिव व पर्यावरण सचिव को भी आदेश दिए हैं कि वे दिल्ली व आसपास के राज्यों में कृषि उत्पाद जलाने से हो रही परेशानियों को दूर करने की दिशा में कदम उठाए और लोगों को भी जागरूक करें कि कचरा जलाने के मामलों को कम किया जा सके। डीएसआइआइडी को भी उद्योगों से निकलने वाले कचरे का सही से निस्तारण करने के लिए कहा गया है। पर्यावरण मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्य सचिव समेत दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।
