दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है। इस पर सियासी रंग यों वाममोर्चे की सरकार के आखिरी दौर में ही चढ़ने लगा था। लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने सत्ता संभालने के बाद इस परंपरा को और मजबूत कर दिया। ज्यादातर दुर्गा पूजा समारोह की आयोजन समितियों का बजट करोड़ों में है। कमोबेश इन पर काबिज तृणमूल कांग्रेस के नेता ही हैं। कहीं संरक्षक की हैसियत से तो कहीं अध्यक्ष। मंत्री, सांसद और विधायक तक इस मोह से परे नहीं।

दरअसल दुर्गा पूजा को सियासी फायदे के लिए भुनाने की ममता बनर्जी की पार्टी की रणनीति कामयाब रही है। तभी तो विपक्षी भाजपा को भी भूत सवार हुआ है पूजा समितियों को कब्जाने का। भाजपा ने तो आकर्षण पैदा करने के मकसद से कई पुरस्कार भी शुरू कर दिए हैं। कमाल देखिए कि ममता बनर्जी के इलाके की एक दुर्गा पूजा का उद्घाटन करने खुद भाजपा आलाकमान कोलकाता आएंगे।

भाजपा भी मान चुकी है कि आम आदमी तक पहुंचने का दुर्गा पूजा समारोह एक सुनहरा अवसर है। तभी तो केंद्रीय मंत्रियों को भी संकेत हो चुका है इन आयोजनों में मौजूदगी दर्ज कराने का। इस बार की पूजा के दौरान भाजपा ने खुद को बंगालियों की पार्टी के रूप में स्थापित करने की सोची है। पार्टी के सूबेदार दिलीप घोष खुद कई पूजा पंडालों का उद्घाटन करेंगे।

हैरानी की बात है कि कुछ दिन पहले ही आयकर विभाग ने कोलकाता की कई प्रमुख पूजा समितियों को नोटिस भेजे थे। तब तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर दुर्गा पूजा विरोधी मुहिम चलाने का आरोप जड़ा था। ममता बनर्जी ने विरोध किया तो आयकर की सफाई आ गई कि नोटिस पुराने हैं।

(प्रस्तुति : अनिल बंसल)