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भारत की राजधानी दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि हजारों साल के इतिहास, सत्ता परिवर्तन और सभ्यताओं के उत्थान-पतन की गवाह रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस शहर का नाम ‘दिल्ली’ कैसे पड़ा? इतिहासकारों के बीच इसे लेकर एक नहीं, बल्कि कई मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं दिल्ली के नाम से जुड़ी उन तमाम कहानियों को, जो इसे और भी दिलचस्प बनाती हैं। (Photo Source: Pexels)
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राजा ढिल्लू (ढिल्लिका) से जुड़ी कहानी
दिल्ली के नाम की सबसे प्राचीन और प्रचलित थ्योरी राजा धिल्लु (या दिलु) से जुड़ी मानी जाती है। माना जाता है कि ईसा पूर्व पहली शताब्दी के आसपास राजा ढिल्लू ने यहां एक नगर बसाया था, जिसे ‘ढिल्लिका’ कहा गया। समय के साथ यह नाम बदलकर ‘धिल्ली’ और फिर ‘दिल्ली’ बन गया।
ऐतिहासिक आधार: मध्यकालीन जैन ग्रंथ प्राल्हाद चरित्र में धिल्लिका नामक नगर का उल्लेख मिलता है, जिसे आज के दिल्ली क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
रोचक तथ्य: कुछ इतिहासकार मानते हैं कि ढिल्लिका का स्थान आज के मेहरौली के आसपास रहा होगा, जो दिल्ली का सबसे पुराना आबाद इलाका माना जाता है। (Photo Source: Pexels) -
‘देहली’ या ‘देहलीज़’ – भारत का प्रवेश द्वार
एक दूसरी मजबूत मान्यता के अनुसार, दिल्ली का नाम फारसी शब्द ‘देहलीज़’ से निकला है, जिसका अर्थ होता है दहलीज या प्रवेश द्वार। उत्तर-पश्चिम से भारत में आने वाले आक्रमणकारियों और व्यापारियों के लिए दिल्ली सदियों तक पहला पड़ाव रही।
ऐतिहासिक आधार: दिल्ली सल्तनत काल के फारसी और तुर्की इतिहासकारों ने अपने लेखों में शहर को देहली/देहलीज़ के नाम से उल्लेखित किया है।
रोचक तथ्य: अरावली पर्वतमाला और यमुना नदी के बीच स्थित होने के कारण दिल्ली हर साम्राज्य के लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही। (Photo Source: Pexels) -
तंवर राजाओं की ‘ढीली’ की कथा
एक लोककथा तंवर (तोमर) राजाओं से जुड़ी है। इसके अनुसार, दिल्ली में स्थित एक पवित्र स्तंभ (आज का लौह स्तंभ) को जब जमीन में गाड़ा गया तो वह पूरी तरह स्थिर नहीं रहा और ‘ढीला’ हो गया। इसी कारण शहर का नाम ‘धिल्ली’ पड़ा।
स्रोत: पृथ्वीराज रासो जैसे मध्यकालीन ग्रंथों में इस कथा का जिक्र मिलता है।
रोचक तथ्य: महरौली का लौह स्तंभ 1600 साल से भी ज्यादा पुराना है और आज तक जंग नहीं लगा, जो आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है। (Photo Source: Pexels) -
ढिल्लिका से दिल्ली और फिर Delhi
भाषाई दृष्टि से देखा जाए तो ढिल्लिका (संस्कृत/प्राकृत) समय के साथ छोटा होकर दिल्ली (Dilli) बन गया। अंग्रेजों के आगमन के बाद इसका अंग्रेजी रूप Delhi प्रचलन में आया।
ऐतिहासिक प्रमाण: 12वीं-13वीं सदी के सिक्कों पर धिल्ली या देहली जैसे शब्दों के संकेत मिलते हैं।
रोचक तथ्य: आज भी शहर का आधिकारिक हिंदी नाम दिल्ली (Dilli) ही है, जो इसके मूल नाम की निरंतरता को दिखाता है। (Photo Source: Pexels) -
ढिल्लों (Dhillon) कबीले से जुड़ा दावा
एक कम चर्चित लेकिन दिलचस्प थ्योरी के अनुसार, दिल्ली का नाम धिल्लों कबीले से जुड़ा हो सकता है। माना जाता है कि कभी यह इलाका धिल्लों समुदाय का प्रभाव क्षेत्र रहा होगा और उसी से नाम पड़ा।
स्थिति: यह थ्योरी इतिहासकारों में पूरी तरह स्वीकार नहीं की गई है, लेकिन कुछ मानवशास्त्रीय अध्ययनों में इसका उल्लेख मिलता है।
रोचक तथ्य: धिल्लों कबीला उत्तर भारत और पंजाब के प्राचीन योद्धा समुदायों में गिना जाता है। (Photo Source: Pexels) -
कई कहानियों से बना एक नाम
इतिहासकार इस बात पर सहमत हैं कि दिल्ली का नाम किसी एक स्रोत से नहीं, बल्कि हजारों सालों में हुए भाषाई, सांस्कृतिक और राजनीतिक बदलावों का परिणाम है। राजपूत, तोमर, सल्तनत, मुगल और ब्रिटिश हर युग ने इस नाम को थोड़ा-थोड़ा बदला। (Photo Source: Pexels) -
रोचक तथ्य:
महाभारत में दिल्ली क्षेत्र को इंद्रप्रस्थ कहा गया है, जिससे यह दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे क्षेत्रों में शामिल हो जाता है। (Photo Source: Pexels)
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