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तीर्थराज प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेला 2026 का शुभारंभ 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के अवसर पर हो चुका है। इस वर्ष यह मेला विशेष रूप से ऐतिहासिक है, क्योंकि लगभग 75 वर्षों बाद बने दुर्लभ संयोग के कारण इसे ‘महामाघ मेला’ कहा जा रहा है। (ANI Photo)
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44 दिनों तक चलने वाला यह पवित्र आयोजन 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के साथ संपन्न होगा। संगम तट पर कल्पवास, जप-तप, दान और स्नान की परंपरा मोक्ष का मार्ग मानी जाती है। (ANI Photo)
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देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। लेकिन कई बार महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि अगर माघ मेले या गंगा स्नान की यात्रा के दौरान अचानक पीरियड्स (मासिक धर्म) आ जाएं, तो क्या करना चाहिए? क्या स्नान करना उचित है या नहीं? (ANI Video Grab)
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शास्त्रों में क्या कहती है परंपरा?
हिंदू शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने की मनाही है। इस समय स्त्री शरीर को ‘अशुद्ध’ नहीं बल्कि विश्राम की अवस्था में माना गया है, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान और पवित्र कर्म वर्जित माने जाते हैं। (ANI Photo) -
इसलिए गंगा, यमुना या संगम में स्नान करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इसके साथ ही शास्त्रों में यह भी उल्लेख है कि इस अवधि में गंगाजल का स्पर्श या धार्मिक पूजन से दूरी बनाए रखना चाहिए। (PTI Photo)
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स्वास्थ्य के लिहाज से क्यों जरूरी है सावधानी?
धार्मिक मान्यताओं के अलावा स्वास्थ्य कारण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। माघ मेले के दौरान मौसम बेहद ठंडा होता है, नदी का पानी अत्यधिक शीतल रहता है, और शरीर पहले से हार्मोनल बदलावों से गुजर रहा होता है। (ANI Video Grab) -
ऐसे में ठंडे पानी में स्नान करने से पेट और कमर दर्द बढ़ सकता है, संक्रमण का खतरा हो सकता है, कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। इसलिए चिकित्सकीय दृष्टि से भी पीरियड्स के दौरान नदी स्नान से बचना ही बेहतर माना जाता है। (ANI Photo)
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क्या है समाधान? मानसिक स्नान का विकल्प
शास्त्रों में महिलाओं के लिए एक सकारात्मक और सम्मानजनक विकल्प बताया गया है- मानसिक स्नान। मानसिक स्नान का अर्थ है आंखें बंद कर श्रद्धा और विश्वास के साथ मन में गंगा या संगम का ध्यान करना, स्वयं को पवित्र जल में स्नान करता हुआ कल्पना करना, और मां गंगा से मन ही मन प्रार्थना करना। (PTI Photo) -
मान्यता है कि ऐसा करने से भी उतना ही पुण्य फल प्राप्त होता है, जितना वास्तविक स्नान से। श्रद्धा का अर्थ केवल शारीरिक कर्म नहीं, बल्कि भाव और विश्वास भी है। ऐसे में मानसिक स्नान और मन की शुद्धता के साथ यात्रा पूरी करना ही सर्वोत्तम विकल्प माना जाता है। (ANI Photo)
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माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व
इस वर्ष माघ मेले में कुल छह प्रमुख स्नान पर्व हैं, जिनका विशेष धार्मिक महत्व है। पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी, मकर संक्रांति – 14 जनवरी, मौनी अमावस्या – 18 जनवरी, बसंत पंचमी – 23 जनवरी, माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी, और महाशिवरात्रि – 15 फरवरी। प्रशासन के अनुसार, इन पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। (PTI Photo) -
साधु-संतों की साधना और कल्पवास
संगम किनारे साधु-संतों, तपस्वियों और महात्माओं की तम्बुओं की नगरी बस चुकी है। कल्पवासियों का कठिन व्रत भी आरंभ हो चुका है, जो 1 फरवरी तक चलेगा। कल्पवास आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। देश-विदेश से आए संत कठोर ठंड में भी खुले आसमान के नीचे साधना में लीन हैं। (ANI Photo)
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