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दुनिया की करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है। सबसे पावरफुल करेंसी कुवैती दिनार है जिसके आगे डॉलर-यूरो भी कुछ नहीं है। (Photo: Pexels)
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कुवैती दिनार लंबे समय से दुनिया की सबसे पावरफुल करेंसी बनी हुई है। एक कुवैती दिनार 295.84 रुपये के बराबर है। (Photo: Pexels)
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डॉलर, पाउंड और यूरो भी कुवैती दिनार के आगे बौने हैं। एक कुवैती दिनार की कीमत 3.25 अमेरिकी डॉलर है। (Photo: Pexels)
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कुवैत को साल 1961 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली थी। इसी साल देश ने कुवैती दिनार को आधिकारिक करेंसी घोषित किया। इससे पहले यहां गल्फ रुपया चलता था। (Photo: Pexels)
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कुवैत ने दिनार की वैल्यू को शुरुआत से ही काफी ऊंचा रखा था ताकि देश के विदेशी व्यापार, खासकर तेल निर्यात को मजबूत आधार मिले। समय के साथ ये दुनिया में सबसे हाई-वैल्यू मुद्रा बन गई। (Photo: Pexels)
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दुनिया के सबसे बड़े तेल-निर्यातक देशों में से एक कुवैत है। देश की जनसंख्या कम और आय अपेक्षाकृत अधिक है। जिसके चलते कुवैत सरकार के पास बड़े फॉरेन रिजर्व्स हैं। आर्थिक स्थिरता बनी रहती है और करेंसी पर संकट का खतरा कम रहता है। (Photo: Pexels) वो देश जहां पर है तीन तरह की करंसी, जानें किसका कैसे और कहां करते हैं इस्तेमाल
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ग्लोबल मार्केट पर कुवैत अपनी करेंसी को पूरी तरह निर्भर नहीं रहने देता। यह एक मैनेज्ड करेंसी बास्केट से जुड़ा है। इसकी वैल्यू कई मजबूत मुद्राओं के आधार पर तय की जाती है। जिसके चलते डॉलर के उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ता है। (Photo: Unsplash)
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कुवैत काफी छोटा देश है। इसकी जनसंख्या 50 लाख से भी कम है। लेकिन प्रति व्यक्ति आय दुनिया में सबसे ऊपरी मानी जाती है। जब देश पर आर्थिक दबाव कम होगा तो करेंसी की वैल्यू मजबूत बनी रहती है। (Photo: Pexels)
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विदेशी निवेश और बैकअप
कुवैत के पास अरबों डॉलर के निवेश फंड हैं। दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड्स में से एक कुवैत इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (KIA) है। यह देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखता है। निवेशकों में ये भरोसा है कि कुवैत आर्थिक रूप से मजबूत है जिसके चलते मुद्रा पर भरोसा बढ़ जाता है। (Photo: Unsplash) -
जहां ज्यादातर खाड़ी देश डॉलर पर निर्भर हैं तो वहीं कुवैत अपनी मुद्रा को बहु-मुद्रा प्रणाली पर आधारित रखता है। इसका फायदा उसे यह होता है कि अमेरिकी डॉलर के गिरने के बाद भी दिनार स्थिर रहता है। (Photo: Pexels)
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कुवैती दिनार इतना पावरफुल क्यों?
तेल की वैश्विक मांग, स्थिर आर्थिक विकास और नियंत्रित विनियम दर नीति के चलते कुवैती दिनार की वैल्यू सबसे अधिक है। व्यापारिक सौदों में मजबूती के लिए कुवैत ने शुरुआत से ही अपनी मुद्रा का वैल्यू ऊंचा रखा था और समय के साथ ये ऊपर जाता रहा। (Photo: Pexels) नेपाल के पास क्यों नहीं है नोट छापने की मशीन, किस देश से छपवाता है अपनी करेंसी?