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जब भी हम भगवान शिव के नटराज रूप को देखते हैं, हमारी निगाहें उनकी दिव्य तांडव मुद्रा, अग्नि-वृत्त, डमरू और अभय-मुद्रा पर टिक जाती हैं। यह रूप सृष्टि, संहार, लय और संतुलन का प्रतीक है।
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लेकिन बहुत कम लोग नटराज के एक पैर के नीचे दबे उस छोटे-से प्राणी को ध्यान से देखते हैं। वही प्राणी है अपस्मार, जिसे दक्षिण भारत में मूयलका (Muyalaka) या पश्मार (Pasmara) भी कहा जाता है।
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कौन है अपस्मार?
अपस्मार एक बौने जैसा दिखने वाला प्राणी है- टेढ़े-मेढ़े अंग, भय से भरी आंखें और उठने की आखिरी कोशिश करता हुआ शरीर। यह कोई साधारण असुर नहीं, बल्कि अज्ञान, अहंकार और आध्यात्मिक अंधकार का प्रतीक है। (Photo Source: Freepik) -
पुराणों के अनुसार, एक समय महान ऋषियों के वन में तप, ज्ञान और साधना के साथ-साथ धीरे-धीरे अहंकार भी पनपने लगा। उनके यज्ञ और मंत्र साधना नहीं, बल्कि शक्ति-प्रदर्शन बन गए। ज्ञान विनम्रता के बजाय घमंड में बदलने लगा। (Photo Source: Indurthi Ramanujarao/Facebook)
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इसी अहंकार और भ्रम से एक यज्ञ की अग्नि से कई विचित्र प्राणी उत्पन्न हुए, जैसे- सर्प, हिंसक जीव और अंत में एक बौना। यही बौना था अपस्मार- अज्ञान की जीवित मूर्ति। (Photo Source: Our Art n Culture/Facebook)
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अपस्मार का प्रभाव
अपस्मार जहां जाता, वहां भ्रम फैलाता। ज्ञानी अपनी विद्या भूलने लगते, अहंकारी खुद को अजेय समझने लगते, और विवेक पर अज्ञान हावी होने लगता। ऋषियों को जल्द ही समझ आ गया कि उन्होंने जिस शक्ति को जन्म दिया है, वही उनके ज्ञान को नष्ट कर रही है। तब उन्होंने शिव का आह्वान किया। (Photo Source: Indurthi Ramanujarao/Facebook) -
शिव का अवतरण: युद्ध नहीं, नृत्य
शिव प्रकट हुए, लेकिन न शस्त्रों के साथ, न क्रोध में। वे प्रकट हुए नटराज के रूप में- ब्रह्मांड के नर्तक। एक शांत मुस्कान के साथ उन्होंने नृत्य शुरू किया। नृत्य जो सृष्टि को संतुलन में रखता है। नृत्य जो जीवन की लय है। और फिर उन्होंने अपना एक चरण उठाया और अपस्मार पर रख दिया। (Photo Source: Freepik) -
अपस्मार का अंत क्यों नहीं किया गया?
यह सबसे गहरा रहस्य है। शिव ने अपस्मार को मारा नहीं। क्योंकि अज्ञान को पूरी तरह नष्ट नहीं किया जा सकता। अगर अज्ञान न हो, तो ज्ञान का अस्तित्व ही कैसे पहचाना जाएगा? इसलिए शिव ने उसे दबाकर रखा- नष्ट नहीं किया, बस नियंत्रित किया। यही संदेश है अज्ञान रहेगा, लेकिन यदि विवेक जागृत है, तो वह हमारे नियंत्रण में रहेगा। (Photo Source: Freepik) -
नटराज की मूर्ति का गूढ़ संदेश
हर नटराज प्रतिमा हमें यही सिखाती है कि ज्ञान का नृत्य तभी संभव है, जब अज्ञान हमारे चरणों तले हो। अपस्मार का उठा हुआ हाथ, उसकी कोशिश करती हुई देह, हमें चेतावनी देती है कि अगर ध्यान हटे, तो अज्ञान फिर सिर उठा सकता है। (Photo Source: Sanathani Udupi/Facebook)
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