Lord Shiva

कब है साल का पहला प्रदोष व्रत? पूजा विधि, मुहूर्त और क्या है इस व्रत का महत्व, जानिए

माना जाता है कि शाप के कारण चंद्रदेव को क्षय रोग हो गया था। इससे मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव के लिए प्रदोष का व्रत रखना शुरू किया।

कब है साल का आखिरी प्रदोष व्रत, जानिए पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat: माना जाता है कि प्रदोष व्रत करने वाले व्यक्ति को रोगों का भय नहीं रहता है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है।

सही विधि से शिव जी के इस स्तोत्र का पाठ करने से मनोकामना पूरी होने की है मान्यता, जानिए

Shiv Stotra: ऐसी मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति सही विधि और श्रद्धा-विश्वास के साथ भगवान शिव के शिव पंचाक्षर स्तोत्र (Shiv Panchakshar Stotra in Hindi) का पाठ करता है तो उस व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कब है दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत, जानिए पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

Pradosh Vrat Kab Hai: ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। जानकारों का मानना है कि जो लोग प्रदोष व्रत रखते हैं, उन्हें कभी कोई रोग-दोष नहीं सताता है।

कब है अगला प्रदोष व्रत, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

Pradosh Vrat: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रदोष व्रत किया जाएगा। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक इस बार प्रदोष व्रत 27 नवंबर, शुक्रवार को किया जाएगा।

कब है अगला प्रदोष व्रत, जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat Puja Vidhi: हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इस व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं।

प्रदोष व्रत के दिन इस विधि से करें प्रदोष स्तोत्र का पाठ, संकटों से मुक्ति मिलने की है मान्यता

Shiv Pradosh Vrat: मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन जो व्यक्ति स्कंद पुराण में वर्णित प्रदोष स्तोत्र का पाठ करता है उनके सभी संकटों का नाश होता है।

सोमवार को इन उपायों के साथ करें भगवान शिव की उपासना, विवाह के योग बनने की है मान्यता

‘पत्नीं मनोरमां देहि, मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीम दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।।’ गौरी-शंकर भगवान के अर्धनारीश्वर रूप के सामने बैठकर इस मंत्र का पांच माला जाप करें। यह मंत्र बहुत जल्द विवाह के योग बनाता है।

कल है भौम प्रदोष व्रत, जानिये कथा और आरती

Pradosh Vrat September 2020 : प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। यह व्रत महीने में दो बार रखा जाता है। शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है।

प्रदोष व्रत के दिन करें इस विधि से पूजा, जानिये व्रत का महत्व और शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत 29 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार के दिन व्रत होने से इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। साथ ही इस बार यह व्रत अधिक मास में आया है इसलिए इसे अधिक प्रदोष व्रत कहा जा रहा है।

कब है अगला प्रदोष व्रत, जानिये महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Pradosh Vrat : यह व्रत 29 सितंबर, मंगलवार के दिन रखा जाएगा। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत होने की वजह से इस व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान हनुमान की पूजा और अधिक फलदायी मानी गई है।

सोमवार को भगवान शंकर का व्रत है फलदायी, सुख-समृद्धि के लिए इस स्तोत्र का जाप करने की है मान्यता

Bhagwan Shiv ki Puja: रोजाना सुबह शिवलिंग पर जल या दूध से अभिषेक करें, आप चाहें तो पंचामृत स्नान भी करा सकते हैं

Viral Video: सावन के महीने में शिव तांडव स्तोत्र का ये वीडियो हो रहा वायरल, मिले करोड़ों में व्यूज

इस शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav) को सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इस वीडियो को करोड़ों में व्यूज मिल चुके हैं। बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) ने भी शिव तांडव का यह वीडियो शेयर किया है। कालीचरण महाराज (Kalicharan Maharaj) ने जिस भक्ति और अद्वितीय तरीके से शिव तांडव स्तोत्र गाया है उसने हर किसी का दिल जीत लिया है।

सावन सोमवार व्रत कथा: जानिए कैसे साहूकार के बेटे को मिला दीर्घायु का वरदान

आज सावन का तीसरा सोमवार व्रत है। इस दिन सोमवती अमावस्या का भी संयोग बन रहा है। सोमवती अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। कई लोग अमावस्या तिथि पर भी व्रत रखते हैं। यहां जानिए सावन सोमवार व्रत की संपूर्ण कथा…

Sawan Special: शिव को क्यों लेना पड़ा अर्धनारीश्वर रूप, जानिए

भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप के आधे भाग में पुरुष रूपी शिव का वास है तो आधे हिस्से में स्त्री रूपी शिवा यानि शक्ति का वास है। भगवान शिव ने यह रूप ब्रह्मा जी के सामने लिया था। मान्यता है कि शिव और शक्ति को एक साथ प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव के इस स्वरूप की आराधना की जाती है।

इन 6 तरह से होता है भगवान शिव का रुद्राभिषेक, जानिए सही तरीका और इसके लाभ

Rudrabhishek Pooja: भक्त अपने घरों में या मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक कराते हैं। खासतौर से सावन में आने वाली शिवरात्रि और नागपंचमी के दिन जलाभिषेक या रुद्राभिषेक कराना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, चंदन समेत शिव को चढ़ाई जाती हैं ये चीजें, जानिए इनका महत्व

शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान विष पीने के बाद शिव का कंठ नीला पड़ गया था। विष की ऊष्णता को शांत करने के लिए महादेव को सभी देवी देवताओं ने जल अर्पित किया। इसलिए शिव पूजा में जल के प्रयोग का महत्व होता है।

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वाराणसी से इंदौर के बीच सप्ताह में तीन बार चलने वाली इस ट्रेन में भक्ति भाव वाली हल्की ध्वनी से संगीत बजेगा और यात्रियों को शाकाहारी खाना परोसा जाएगा।

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