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भारत जैव विविधता से भरपूर देश है, जहां हजारों प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। लेकिन बदलती जलवायु, तेजी से हो रहा शहरीकरण, जंगलों की कटाई और अवैध शिकार के कारण कई दुर्लभ पक्षी आज विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके हैं। IUCN Red List के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में कई ऐसी पक्षी प्रजातियां हैं जिनकी संख्या अब सैकड़ों या कुछ दर्जनों तक सिमट गई है। आइए जानते हैं भारत के उन 9 दुर्लभ पक्षियों के बारे में, जो आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं-
(Photo Source: Pexels) -
हिमालयन क्वेल (Himalayan Quail)
अनुमानित संख्या: 1–49 (संभावित)
यह पक्षी दशकों से दिखाई नहीं दिया है और इसे ‘संभावित विलुप्त’ माना जाता है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इसके अस्तित्व की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। (Photo Source: Unsplash) -
जेर्डन का कोर्सर (Jerdon’s Courser)
अनुमानित संख्या: 1–50
यह पक्षी आंध्र प्रदेश तक सीमित है और इसे दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में गिना जाता है। यह रात में सक्रिय रहता है, जिससे इसके संरक्षण में भी कठिनाई आती है। (Photo Source: Pexels) -
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard)
अनुमानित संख्या: 50–249
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल है। यह मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात के घास के मैदानों में पाया जाता है। बिजली की हाई-वोल्टेज लाइनों से टकराना और प्राकृतिक आवास का नष्ट होना इसके विलुप्त होने के बड़े कारण हैं। (Photo Source: Pexels) -
स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर (Spoon-billed Sandpiper)
अनुमानित संख्या: 240–620
यह बेहद छोटा प्रवासी पक्षी भारत के तटीय इलाकों में देखा जाता है। तटों का प्रदूषण और शिकार इसकी घटती संख्या के मुख्य कारण हैं। (Photo Source: Pexels) -
बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican)
अनुमानित संख्या: 250–999
यह सुंदर पक्षी असम और उत्तर भारत के घास के मैदानों में पाया जाता है। खेती के विस्तार और घास के मैदानों के खत्म होने से इसकी संख्या में भारी गिरावट आई है। (Photo Source: Pexels)
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फॉरेस्ट आउलेट (Forest Owlet)
अनुमानित संख्या: 250–999
कभी विलुप्त समझा जाने वाला यह उल्लू मध्य भारत के जंगलों में दोबारा खोजा गया था। जंगलों की कटाई और मानवीय दखल इसके लिए खतरा बने हुए हैं। (Photo Source: Pexels) -
ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क (Greater Adjutant Stork)
अनुमानित संख्या: 1,360–1,510
यह विशालकाय पक्षी मुख्य रूप से असम और बिहार में पाया जाता है। कूड़े के ढेर और गीले क्षेत्रों के खत्म होने से इसकी आबादी प्रभावित हुई है। (Photo Source: Pexels) -
इंडियन वल्चर (Indian Vulture)
अनुमानित संख्या: 5,000–15,000
एक समय आसमान में झुंड के झुंड दिखने वाला यह पक्षी अब दुर्लभ हो गया है। पशुओं में इस्तेमाल होने वाली दवा डाइक्लोफेनाक इसके लिए सबसे बड़ा खतरा बनी। (Photo Source: Pexels) -
सोशिएबल लैपविंग (Sociable Lapwing)
अनुमानित संख्या: लगभग 11,200
यह प्रवासी पक्षी भारत में सर्दियों के दौरान आता है। हालांकि संख्या अन्य प्रजातियों की तुलना में अधिक है, लेकिन इसके प्राकृतिक ठिकानों में लगातार कमी आ रही है। (Photo Source: Pexels) -
संरक्षण की जरूरत क्यों?
ये पक्षी केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इनका संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है। सरकार, वन विभाग और आम नागरिक मिलकर अगर जागरूकता और संरक्षण के प्रयास बढ़ाएं, तो इन दुर्लभ पक्षियों को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है। (Photo Source: Pexels)
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