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अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहरा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैदिक मंत्रोच्चार और ‘जय श्री राम’ के नारों की गूंज के बीच मंगलवार को ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। (Photo: PTI)
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राम मंदिर के शिखर पर केसरिया रंग के इस ध्वज पर कई विशेष चिन्ह हैं जिनका बेहद ही खास और धार्मिक महत्व है। इनमें एक वृक्ष का भी चिन्ह है जिसे धरती का पहला हाइब्रिड पेड़ कहा जाता है। आइए जानते हैं इस वृक्ष के बारे में विस्तार से: (Photo: PTI)
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ध्वज पर तीन विशेष चिन्ह
ध्वज की लंबाई 22 फीट, चौड़ाई 11 फीट और दंड 42 फीट का है। इसे 161 फीट ऊंचे शिखर पर स्थापित करने की तैयारी चल रही है। ध्वज पर तीन विशेष चिन्ह अंकित हैं—सूर्य, ॐ, और कोविदार। इस ध्वज को सूर्य भगवान का प्रतीक भी माना जाता है। इन तीनों चिन्हों का विशेष धार्मिक महत्व है। (Photo: PTI) -
कोविदार वृक्ष का महत्व
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बताया कि इस धर्म ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। इसका रूप कचनार जैसे लगता है। इसके साथ ही इसे मंदार और पारिजात का ये मेल है। ये दोनों ही देव वृक्ष कहलाते हैं। दो देवों वृक्षों के गुणों का समुच्चय है। उनके अनुसार यह वृक्ष रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है। वह सत्ता वृक्ष से व्यक्त होती है जिसके बारे में कहा गया कि, सबके लिए छाया देते हैं स्वयं धूप में खड़े रहकर, फल स्वयं उगाते हैं लेकिन बांट दूसरों को देते हैं। वृक्ष सत्पुरुष होते हैं। धर्म जीवन ऐसा ही होता है। (Photo: PTI) -
पौराणिक कथा
पौराणिक ग्रंथों में भी कोविदार वृक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। यह अयोध्या का पावन वृक्ष था जो उस समय ध्वज पर अंकित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम जब माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास के लिए जा रहे थे तब भरत उन्हें रोकने के लिए सेना के साथ जाते हैं। सेना का शोर सुनकर जब भगवान राम लक्ष्मण जी से पूछते हैं कि यह शोर कैसा है तो वह उत्तर की तरफ से आ रही सेना को देखते हैं वह सेना के ध्वज पर बने कोविदार वृक्ष को देखकर पहचानते हैं कि सेना अयोध्या की है। (Photo: PTI) -
आयुर्वेद में है खास महत्व
आयुर्वेद में कोविदार वृक्ष का बेहद खास महत्व है। इसके फूल, पत्तियों से लेकर छाल तक को औषधि बताया गया है। इनका इस्तेमाल कई सारे गंभीर रोगों में इस्तेमाल किया जाता है। (Photo: Freepik) -
दुनिया का पहला पेड़
कोविदार वृक्ष को लेकर एक मान्यता यह भी है कि यह प्राचीन काल का पहला हाइब्रिड वृक्ष था जिसे ऋषि कश्यप ने पारिजात और मंदार को मिलाकर बनाया था। इस वृक्ष पर बैंगनी रंग के सुगंधित फूल खिलते हैं। (Photo: Pexels) -
राम मंदिर में दिखेगी इनका मनमोहक दृश्य
रम मंदिर परिसर में भी कोविदार वृक्ष का मनमोहक दृश्य देखने को मिलेगा। दरअसल, प्राण प्रतिष्ठा के समय ही परिसर में कोविदार के वृक्ष लगाए गए थे। यह 15 से 25 मीटर तक लंबा होता है। इन पर खिलने वाले बैंगनी रंग के फूल इस पौधे की सुंदरता और भी बढ़ा देते हैं। (Photo: Pexels) -
किसने बनाया है यह ध्वज
इस ध्वज को अहमदाबाद की एक पैराशूट बनाने वाली कंपनी ने बनाया है। इसे नायलॉन और सिल्क के साथ मिलाकर एक मजबूत कपड़े से बनाया गया है ताकि तेज हवाओं और मौसम की चुनौतियों का सामना कर सके। (Photo: PTI)