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अध्यात्म यानी स्वयं (आत्मा) के स्वरूप को जानना, जीवन के गहरे अर्थ और उद्देश्य को खोजना और इस भौतिक जीवन से परे जाकर स्वयं से बड़ी किसी चीज भगवान या ब्रह्मांड से जुड़ना है। इसमें ध्यान, योग, प्रकृति-प्रेम शामिल है। असल जीवन की यात्रा बाहर से नहीं बल्कि भीतर से शुरू होती है। (Photo: Freepik)
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इंसान किसी न किसी वजह से धरती पर जन्म लेता है। कुछ लोग इसे खोज लेते हैं तो कुछ मायाजाल में उलझ जाते हैं। कुछ ऐसे संकेत हैं जो यह बताते हैं कि आपका जन्म आध्यात्मिक उद्देश्य के लिए हुआ है। (Photo: Freepik)
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आध्यात्मिकता को लोग समझते हैं कि इस जीवन से संन्यास लेकर सन्यासी बनना, सन्यासी का वस्त्र धारण करना या फिर उपदेश देना है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आप गृहस्थ या फिर आम जीवन में जीते हुए भी अध्यात्म को अपना सकते हैं। यहां चार संकेत बताए गए हैं जो बताते हैं कि आपका जन्म केवल जीवित रहने या सफल होने के लिए नहीं, बल्कि किसी गहरे उद्देश्य के लिए हुआ है। (Photo: Pexels)
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1- हमेशा थोड़ा अलग महसूस करना
जब आपके पास सबकुछ हो और इसके बाद भी अंदर से अलग महसूस करते हैं। लोगों से मिलते हैं, हंसते हैं, काम करते हैं लेकिन मन कुछ और करने के लिए कहता है। यह आपकी कमजोरी नहीं बल्कि यह संकेत है कि आपका ध्यान अंदर की ओर है। अगर आपने खुद को पहचान लिया तो धीरे-धीरे यही एहसास उपहार उपहार बन सकता है। (Photo: Unsplash) 24 घंटे में सिर्फ 10 मिनट कर लें ये 5 प्राणायाम, तन स्वस्थ और मन को मिलेगी आध्यात्मिक शांति -
2- दुख ने आपको कठोर नहीं, गहरा बनाया
कष्ट जीवन का हिस्सा है। इससे कोई निखर जाता है तो कोई बिखर जाता है। दर्द, हानि या फिर कष्ट के बाद भी अगर आप शांत, समझदार और संवेदनशील बने रहे तो यह अध्यात्म में महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। दर्द सजा नहीं होता वह आपको मजबूत और गहरा बनाता है। (Photo: Pexels) -
3- सच्चाई
अगर आप दिखाने की दुनिया से परे हैं और भ्रम को स्वीकार नहीं करते। साथ ही मन में ये सवाल उठता है कि मैं कौन हूं? मेरा उद्देश्य क्या है? सफलता के बाद भी खालीपन क्यों है? तो आप किसी बड़े उद्देश्य के लिए जन्मे हैं। बस खुद को पहचानने की जरूरत है। (Photo: Freepik) -
4- भीतर की अवस्था के लिए खुद को जिम्मेदार समझना
मन चंचल और विशाल होता है। कई बार अपनी परिस्थिति का ठिकरा लोग दूसरों पर फोड़ देते हैं। लेकिन स्थिति बिगड़ने के बाद भी अगर आपका मन विचार करता है, खुद को संभालते हैं और आपको महसूस होता है कि आपका आंतरिक संतुलन की बाहर जीवन को दिशा देता है तो यह भी अध्यात्म का संकेत बताया गया है। (Photo: Freepik) -
इसके साथ ही जब आप अनावश्यक शिकायत या किसी को दोष देने के बजाए खुद को अंदर से बेचैन पाते हैं। इसका अर्थ होता है कि आपके लिए संतुलन सही होने से अधिक महत्वपूर्ण है। तो धीरे-धीरे लोग आपकी स्थिरता पर भरोसा करने लगते हैं। बिना कुछ बोले लोग आपको समझने लगते हैं। इसी को अध्यात्म की पहली सीढ़ी कई है। (Photo: Freepik) आध्यात्मिकता का 5-7-5 नियम, मन को शांत करने और सुखी जीवन का है सबसे सरल तरीका