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1- ये जन्म गलत संस्कार मिटाने के लिए मिला है, उन्हें बढ़ाने के लिए नहीं।
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2- जब तक नाम जप नहीं होगा, तब तक जीवन में तृप्ति नहीं मिलेगी।
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3- दूसरों में दोष-दर्शन करने से आपकी भक्ति क्षीण हो जाती है।
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4- बाहरी परिवर्तन, परिवर्तन नहीं, आंतरिक वृत्ति कहां जा रही है यह देखें।
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5- मन और इंद्रियों को छोड़ देना विषयी पुरुष का लक्षण है।
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6- गुरु के वचनों पर विश्वास होने से ही अध्यात्म का बल मिलता है।
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7- भजन बिना प्रेम प्राप्त नहीं होता और प्रेम बिना भगवान नहीं मिलते।
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8- साधक अगर कामनाओं से बचे, तो उसकी आध्यात्मिक उन्नति शीघ्र होती है।
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9- भूत और भविष्य की चिंता करके वर्तमान को नष्ट न करें।
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10- चित्त में भय का आना पूर्व के पापों का फल है। चाणक्य नीति: इन 7 लोगों के साथ रहने से किसी भी वक्त बुरा फंस सकते हैं, दस कदम रहे दूर