मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में बिहार में एनडीए को जनता का अपार समर्थन मिला है और जीत का आंकड़ा 202 सीटों को छू गया। 2010 में एनडीए को 206 सीटों पर जीत मिली थी । इस जीत के एक प्रमुख आर्किटेक्ट हैं राज्य सभा सदस्य और जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा।

आम जनमानस में उनकी छवि एक शालीन और सभ्य नेता के रूप में स्थापित है। जो उतना ही बोलते हैं जितनी दिशा देने के लिए जरूरत है । एक शब्द में भी वो राजनीतिक उठा पटक के बीच बहुत गंभीर और बड़ी बात कह जाते हैं । उनके काम करने की शैली बेहद सटीक और परिणामों एवं सकारात्मक संभावनाओं को जन्म देने वाली होती है।

चाहे वो संगठन का काम हो ,सरकार का हो या फिर गठबंधन की अलग अलग गांठों को बांधने या डोर उलझी हो तो सुलझाने का। वो टाइगर के दबे पांव की तरह सारे कामों में ऐसे सक्षम हैं कि दूसरा कोई सानी नहीं। मैं बेहद जिम्मेदारी से ये बात कह रहा हूं क्योंकि मैने बेहद नजदीक से उनके साथ लगातार काफी काम किया है।

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ऑब्जेक्टिविटी को हासिल करना और तरकश के तीर को लक्ष्य पर भेद देने में उनके जैसा कोई दूर दूर तक नहीं दिखता। कम बोलना और संगठन के व्यक्तियों को ही नहीं बल्कि जनसमूह को भी रिजल्ट ओरियंटेड मार्गदर्शन एवं प्रेरणा वो बेहद कम शब्दों में दे देते हैं । लोग उनसे इस तरह कन्विंस होते है कि उनके कायल हो जाते हैं । उनका कथन और पंच लाइन लोगों को याद रह जाता है और विपरीत बह रही धारा का मुख वो मोड़ देते हैं।

जेएनयू से पढ़े हैं संजय झा

संजय झा का एक लंबा राजनीतिक जीवन है । जेएनयू से पढ़ाई के बाद उन्होंने एक लंबा समय राजनीति के हर कार्यों में दिया है। चाहे वो अटल जी के नेतृत्व में 1997 का चुनाव हो या स्वर्गीय अरुण जेटली जी के नेतृत्व में आतंकवाद पर विज्ञान भवन में अंतराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हो या 2005 का बिहार विधानसभा चुनाव में लगातार काम करना हो जिसमें पहली बार बिहार में एनडीए की सरकार बनी । संजय झा की भूमिका सबमें बेहद महत्वपूर्ण रही है।

जनता से संवाद के विविध आयामों को वह तरजीह देते हैं और सच्चाई तो ये भी है कि अटल जी को एक कागज देना था कि ये मुद्दा उठाना है तो संजय झा वहां पहुंचे कि ये चूक ना रह जाए । मीडिया में उन्हें स्व अरुण जेटली जी का बेहद करीबी बताया है। ये बात अक्षरशः सत्य है। संजय जी ने भी कई मंचों पर जेटली जी के बारे में बोलते हुए कहा है कि आज मेरी राजनीतिक यात्रा में जो शुभारंभ है वो अरुण जेटली की देन है।

जेटली जी नीतीश जी के बेहद करीबी मित्र थे। उनकी वजह से ही संजय झा भी नीतीश जी के करीब आए। नीतीश जी ने संजय झा के कांधे पर एक से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जिसमें उन्होंने शत प्रतिशत सकारात्मक परिणाम दिए।

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जदयू का किया विस्तार

बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने बिहार को बाढ़ के आपदा से बाहर निकाला। जल जीवन हरियाली मिशन उनके मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण मिशन बना। संजय झा संगठन में पार्टी के महासचिव रहे तो अन्य राज्यों में जदयू संगठन का विस्तार के साथ साथ बिहार विकास का नीतीश मॉडल पर उनके प्रयासों से चर्चाएं तेज हुई।

नीतीश जी की राष्ट्रीय नेता के रूप में छवि का विस्तार करने में श्री संजय झा की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है । भारतीय जनता पार्टी और जदयू के बीच के संवाद और समन्वय के वो लगातार महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं।

बिहार के इस प्रचंड जीत में उन्होंने गठबंधन को सही स्वरूप में पिरोया । नीतीश कुमार जी के इशारों को भी वो समझते हैं तो टिकट कहां से कैसे, किस सीट पर किस दल को, दल की महत्ता और किसकी जीत की संभावना सबसे ज्यादा इन तमाम चीजों को बारीकी से देखा और एक मजबूत पक्ष को स्थापित कर जीत के लक्ष्य को सुनिश्चित किया और कराया। कहाँ और किधर से जनसभा किस मंच से कौन से मुद्दे आदि पर उनकी पकड़ ने एनडीए को सबसे आगे रखा । जब नीतीश कुमार जी बारिश के कारण सड़क मार्ग से जनता से रूबरू होने निकले तो श्री झा ने इस पूरे महत्वपूर्ण पक्ष को संचार माध्यमों से जननेता नीतीश जी के जोश के स्वरूप में पूरे बिहार में एक नई छवि के रूप में स्थापित किया । उनकी बारीक नजर में एक एक पक्ष सदैव शामिल रहता है । जिसका फायदा एनडीए को मिला । संजय झा किसी बात में चूक नहीं जाते। उनका निशाना एक राजनीतिज्ञ के रूप में बेहद अचूक है।

लोगों को याद होगा कि अचानक कहा जाने लगा कि एनडीए गठबंधन में खटपट है। विपक्ष ने भी सोशल मीडिया और मीडिया में ‘प्लांटेड स्टोरी’ कराई कि चिराग जी को सीट विशेष चाहिए तो कुशवाहा जी इतनी सीटों पर अडे़ हुए हैं। यह खबर भी चलाई गयी कि नीतीश जी इसे लेकर नाराज हो गये। संजय झा सोशल मीडिया और मुख्य धारा की मीडिया की खबरों की भाषा को जानते समझते हैं । उनको ये भी पता होता है किस खबर में किसने कितना तेल डाला है। इसलिए उन्होंने मात्र एक बयान दिया और ताश के पत्तों की तरह विपक्ष का प्लान धराशाई हो गया। उन्होंने जिस आत्मविश्वास से मीडिया से कहा सबकुछ नीतीश जी की मर्जी से हो रहा है उनके संज्ञान में सबकुछ है उन्होंने ऊपर स्वयं बात भी की है इतने भर से मीडिया के एक पक्ष का प्रपंच धुएं की तरह उड़ गया।

एक मजबूत गठबंधन के सिपाही की तरह सभी लोग कदम-कदम बढ़ाते गए। घोषणा पत्र आया। चुनाव प्रचार की कमान नीतीश जी का तुरंत संभालना और उसमें तेजी से लगातार जन सभाएँ करते जाना, एनडीए की सफलता की रफ्तार को बढ़ाता गया।

मुख्यमंत्री कौन होगा इस पर लगातार विपक्ष ने नीतीश जी को सहानुभूति के कठघरे में रखकर दुष्प्रचार किया। संजय जी ने इस चुनौती को ये कहकर शिकस्त दी कि वैकेंसी कहां हैं और महाराष्ट्र का मसला अलग है। बिहार में 20 सालों से नीतीश कुमार जी का काम बोल रहा है।

नकारात्मक प्रचार से सजंय झा सदैव बचे। उन्होंने नीतीश सरकार के सकारात्मक पक्ष पर सबको आगे बढ़ने कहा और खुद की शैली से बताया कि कैसे काम किया जाता है। उन्होंने संगठन, घोषणा पत्र, नीतीश जी के काम और केंद्र एवं बिहार दोनों जगह मन मुताबिक सरकार के फायदे को मुख्य मुद्दा बनाया। नीतीश जी के नेतृ्त्व में बिहार के विकास के नए प्लान की रूपरेखा जनता के बीच रखकर उन्होंने प्रो इनकम्बैनसी का जादू दिखाया।

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सोशल मीडिया पर है जबरदस्त पकड़

संजय झा की सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त पकड़ है। सोशलमीडिया पर चलने वाले नरेटिव से भी वह बिहार की जनता की नब्ज पर लगातार अंगुली रखे रहे। जब और जहाँ हस्तक्षेप की जरूरत हुई उन्होंने बिना समय गवाएँ उस नुक्ते को दुरुस्त कराया। सोशलमीडिया के माध्यम से भी एनडीए की टीम ने नीतीश जी एवं मोदी जी के संवाद को सीधा जनता तक पहुंचाया।

संजय झा की आखिरी खासियत कि वो पांच लोगों की बैठक से भी उस विधानसभा की तस्वीर बदल सकते हैं जहां हवा अपने पक्ष में नहीं दिख रही हो । वो चाय पीते हैं और पीते पीते अपनी बातों और असली मुद्दों से हवा को अपने पक्ष में कर लेते हैं वो सबकी सुनते हैं और एक लाइन ऐसा कहते हैं कि सब उस ओर चल देते हैं। लेकिन कहते हैं ना सिर्फ रणनीति से कुछ नहीं होता कुछ धरातल पर काम होना चाहिए । तो बताता चलूं कि जब वो पहली बार एमएलसी बने तो उन्होंने लक्ष्य आधारित कार्य किया और संदेश साफ था मुझसे ज्यादा मेरा काम बोलेगा। उन्होंने अपने क्षेत्र में इतने पेड़ पौधे लगवाए कि वहां की आबोहवा बदल गई। मंत्री रहते हुए उन्होंने हर नदी की धारा के बाढ़ को कंट्रोल में रखने की व्यवस्था करवायी। दरभंगा में आज जो एयरपोर्ट दिख रहा है एम्स दिख रहा है और मिथिला हाट की जो अंतराष्ट्रीय आभा विदेशों की धरती पर चमक रही है उसमें संजय झा का अमूल्य योगदान है।

प्रचंड जीत का आर्किटेक्ट होना इतना आसान भी नहीं है । रात को चाहे जितनी देर से सोएँ सुबह 5 बजे उठकर काम पर लग जाना संजय जी की विशेषता है । नीतीश जी की टीम का हिस्सा होना इतना आसान नहीं है क्योंकि नीतीश जी की कार्यशैली बेहद पैनी और विस्तार के एक एक पक्ष और कोण से भरी और एकदम एक्यूरेट है । संजय कुमार झा नीतीश जी के सभी पैमानों पर खरे उतरते हैं।

(लेखक सत्य प्रकाश मिश्रा जदयू के पूर्व प्रवक्ता हैं।)