संकल्प अंतर्मन में उत्पन्न होने वाली एक ऐसी अद्भुत शक्ति है, जो जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने और साथ ही दुस्साध्य लक्ष्य को भी भेदने में समर्थ होती है। दरअसल, संकल्प हमारे मन-मस्तिष्क की एक विशेष अवस्था है, जिसमें हमारा मन चरम उत्साह के साथ-साथ अथक परिश्रम और प्रयत्न के भाव से ओत-प्रोत रहता है। ये विशिष्ट भाव अंतर्मन को तीव्र गति प्रदान करते हैं और परिणामस्वरूप हमारा अंतर्मन शरीर को त्वरित प्रयास के लिए निर्दिष्ट करते हुए लक्ष्य के साधन को सफल बनाता है। परिस्थितियों की प्रतिकूलता, मार्ग की कठिनता एवं संसाधनों की सीमा, ये सभी प्रतिकूल कारक संकल्प की शक्ति के आगे प्रभावहीन हो जाते हैं।

संकल्प हमारे भीतर लक्ष्य के प्रति एक सशक्त प्रतिबद्धता का उदय करता है और उस दशा में हम समस्त बाधाओं को दरकिनार करते हुए निरंतर आगे की ओर उन्मुख होते हैं। संकल्प सही अर्थों में एक ऐसा मानसिक अनुबंध है, जो मनुष्य स्वयं से करता है। जब कोई व्यक्ति संकल्प लेता है, तो वह केवल विचार ही नहीं करता, बल्कि अपने विचारों, कर्मों और समय को एक दिशा में केंद्रित करते हुए अपनी यात्रा आरंभ करता है। संकल्प से ही विचार कर्म में और कर्म उपलब्धि में रूपांतरित होता है। बिना संकल्प के जीवन दिशाहीन हो जाता है और दिशाहीनता असफलता को जन्म देती है। संकल्प जीवन को एक निश्चित उद्देश्य प्रदान करते हुए उसमें सार्थकता का समावेश करता है।

आज के परिवेश में, जबकि विकल्पों की भरमार है और विशेष बात यह कि ध्यान को विचलित करने वाले कारक प्रत्येक स्थान एवं परिस्थिति में उपस्थित हैं, संकल्प का महत्त्व विशिष्ट हो जाता है। आमतौर पर मनुष्य स्वप्न तो बहुत देखता है, लेकिन उन्हें साकार करने के लिए प्रयत्न एवं कर्म करने में सर्वथा असफल रहता है। यही वजह है कि मनुष्य निराशा से घिर जाता है। दरअसल, समस्या सामर्थ्य की नहीं, संकल्प के अभाव की होती है। दृढ़ संकल्प साधारण व्यक्ति को भी असाधारण बना देता है।

भारतीय संस्कृति में संकल्प को विशेष महत्त्व दिया गया है। हमारे शास्त्रों में ‘संकल्प शक्ति’ को ईश्वर की प्राप्ति का माध्यम माना गया है। जब व्यक्ति किसी व्रत को धारण करता है, तब वह अपने मन को नियंत्रित करते हुए पूरी तरह लक्ष्य पर केंद्रित करता है। यही कारण है कि महापुरुषों, मुनियों एवं साधकों ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने संकल्प से बिना विचलित हुए समाज को नई दिशा प्रदान की।

संकल्पशीलता के अनेक उदाहरण इतिहास के महासागर में विद्यमान हैं। महात्मा गांधी का सत्य और अहिंसा का संकल्प, भगत सिंह का स्वतंत्रता के लिए बलिदान का संकल्प, भीमराव आंबेडकर का सामाजिक न्याय का संकल्प, इन सभी ने न केवल अपने जीवन को सार्थक बनाया, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र को दिशा दी। संकल्प व्यक्ति के चरित्र को भी निर्मित करता है।

संकल्प पर अडिग व्यक्ति आत्मविश्वास से भरा होता है। उसे अपने कर्म एवं निर्णयों पर पूरा विश्वास होता है और वह असफलताओं से भय से लेशमात्र भी घबराता नहीं। असफलता उसके लिए अंत नहीं, बल्कि एक शिक्षा और नई शुरुआत होती है। संकल्पशील व्यक्ति असफलता मिलने पर भी कहीं अधिक दृढ़ता से उठता है।

इसके विपरीत, क्षीण संकल्प वाला व्यक्ति छोटी-सी बाधा आने पर ही निराश हो जाता है और प्रयत्न को त्याग देता है। सामाजिक जीवन में संकल्प व्यक्ति को उत्तरदायित्व का बोध कराता है। जब कोई व्यक्ति समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प लेता है, तब वह केवल अपने हित तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि दूसरों के कल्याण के लिए भी तत्पर रहता है।

दृढ़ संकल्प के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। यह सच है कि बड़े परिवर्तन हमेशा लघु संकल्पों से ही प्रारंभ होते हैं। व्यक्तिगत जीवन में संकल्प आत्म परिवर्तन और आत्म-परिष्कार का माध्यम है। अवगुणों को त्यागते हुए सद्गुणों से युक्त स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने के लिए संकल्प नितांत आवश्यक है।

परिवर्तन केवल इच्छामात्र से नहीं घटित होता, बल्कि दृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास से संभव हो पाता है। जब व्यक्ति जीवन को सुंदरता और सार्थकता प्रदान करने के लिए स्वयं से वचनबद्ध होता है, तभी वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत होती है। यह भी एक कटु सत्य है कि संकल्प को बनाए रखना आसान नहीं होता।

समय और परिस्थितियां उत्साह को क्षीणता की ओर अग्रसर करते हैं, बाधाओं को बढ़ा सकते हैं। ये कर्म और प्रयत्न के तारतम्य को भी बाधित करते हैं। ऐसी दशा में आत्मचिंतन और आत्मप्रेरणा आवश्यक हो जाती है। व्यक्ति को संकल्प का स्मरण कर उसके उद्देश्य को फिर से समझते हुए कर्म की निरंतता को किसी भी तरह बनाए रखना चाहिए।

संकल्प जितना स्पष्ट और दृढ़ होगा, लक्ष्य को साधना उतना ही आसान होगा। कहा जा सकता है कि संकल्प मानव जीवन की वह आधारशिला है, जिस पर सफलता, चरित्र और सार्थकता का भवन खड़ा होता है। संकल्प के साथ साधारण क्षमता भी असाधारण उपलब्धियों को अर्जित कर सकती है।

संकल्प व्यक्ति को परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका स्वामी बनाता है। जीवन की प्रत्येक चुनौती संकल्प की कसौटी है और प्रत्येक उपलब्धि संकल्प की विजय। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने जीवन में संकल्प की शक्ति को पहचानते हुए उसे लगातार विकसित करें। छोटे-छोटे संकल्पों से आरंभ करते हुए धीरे-धीरे बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ें। जब संकल्प सशक्त होगा, तब जीवन अपने आप ही सशक्त होता जाएगा। यही संकल्प की वास्तविक महत्ता है।