सेलिब्रिटी विज्ञापन (Celebrity Advertising), भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisements)
सितारों के विज्ञापन पर कौन रखेगा नजर? सेहत से खिलवाड़ करने वाले प्रचार पर जवाबदेही जरूरी

पिछले दिनों राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फिल्मी कलाकारों से आग्रह किया कि वे ऐसी चीजों…

नरेंद्र मोदी, विकसित भारत 2047 (Viksit Bharat 2047), मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां
मोदी भी उसी रास्ते पर चल पड़े, जिस पर कांग्रेस देश को ले गई थी | तवलीन सिंह का विचार

2014 में नरेंद्र मोदी से लगी उम्मीदों से लेकर 2047 के विकसित भारत के सपने तक, तवलीन सिंह ने रोजगार,…

बीजों का भविष्य, किसान के बीज अधिकार, जीएम बीज
खेती के भविष्य से लेकर हमारी थाली तक अहम है बीज पर अधिकार का सवाल | विचार

निमिषा सिंह ने अपने इस लेख में बताया है कि बीजों की बदलती दुनिया में किसान के अधिकार, आत्मनिर्भरता, जैव…

Sudhish Pachauri satire, the clamor of a trial of strength
जोर आजमाइश का शोर: सड़कों से सियासत तक, आरोपों और जवाबी हमलों का दौर | सुधीश पचौरी का तीखा व्यंग्य

सियासी तमाशे, मीम-रील और आरोपों के शोर के बीच सत्ता-विपक्ष की लड़ाई और 2047 के विकसित भारत के संकल्प का…

Artificial Intelligence and Education, AI and Education
विचार | एआई की बढ़ती ताकत के बीच कितना सुरक्षित है इंसानी नियंत्रण?

सामान्य कार्यों में स्वतंत्रता उपयोगी हो सकती है, लेकिन संवेदनशील आंकड़ों, महत्त्वपूर्ण प्रणालियों, वित्तीय लेन-देन और मानव जीवन से जुड़े…

पास होकर भी दूर क्यों हो रहे हैं लोग? रिश्तों पर भारी पड़ती स्क्रीन की दुनिया | दुनिया मेरे आगे

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें पवन शर्मा के विचार।

Bosnia voting system, चुनावी पारदर्शिता, biometric voting, biometric voter identification
विचार | बोस्निया की मतदान प्रक्रिया में ऐसा क्या है, जो भारत के लिए बन सकता है मिसाल?

पुष्परंजन अपने इस लेख में बता रहे हैं कि इस समय विमर्श का विषय यह है कि जिस इलेक्ट्रॉनिक पहचान…

reform in water management, water management in india, namami gange, भारत जल प्रबंधन, जल सुरक्षा, गुजरात जल प्रबंधन मॉडल, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे,
जल प्रबंधन में व्यापक सुधारों की राह, भारत के जल प्रबंधन मॉडल से दुनिया ने ले सकती है सीख

वैश्विक जलप्रबंधन के क्षेत्र में भारत का प्रभाव काफी बढ़ा है। वह कभी एक ऐसा देश था, जिसे बार-बार जलवायु…

Lest childhood, burden of responsibilities
जिम्मेदारियों के बोझ तले कहीं खो न जाए बचपन, जिंदगी में छोटी खुशियों के लिए समय निकालना क्यों है जरूरी? दुनिया मेरे आगे

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें पल्लवी पल्लव के विचार।

महिला सशक्तीकरण, लड़कियों का सशक्तीकरण, जेन जी, Gen Z
सवालों से बदल रही है लड़कियों की दुनिया, सशक्तीकरण का नया समाजशास्त्र | विचार

मणिमाला शर्मा अपने इस लेख में बता रही हैं कि परंपरागत समाज ने लड़कियों के लिए एक सुरक्षित घेरा तय…

मार्टिन हाइडेगर, हाना आरेंट, Heidegger Hannah Arendt
हाइडेगर और हाना आरेंट: जब प्रेम के साथ चलता रहा विचार और मतभेद | विचार

हाइडेगर और आरेंट के सामने साथ रहने या बिछड़ने का विकल्प था। हाइडेगर ने जर्मनी नहीं छोड़ा और आरेंट अमेरिका…

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