दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर राज्यसभा में गुरुवार को सरकार को घेरते हुए विपक्षी दलों के सदस्यों ने दावा किया कि सच सामने आ गया है। सदस्यों ने गुजरात के ऊना सहित देश भर में दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने जहां देश के विभिन्न भागों में गौ रक्षकों पर रोक लगाने की मांग की वहीं कांगे्रस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि गुजरात की ताजा घटना से गुजरात माडल की सच्चाई बेनकाब हो गई है। यादव ने राज्यसभा में हुई अल्पकालिक चर्चा में भाग लेते हुए सवाल किया कि इन गौ रक्षकों को किसने व क्यों तैनात किया।
सरकार इन पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाती है। हमारी जाति व्यवस्था में तालिबान जैसा रुख है। गुजरात में यह गौ रक्षक कहते हैं कि गाय में 33 कोटि देवी देवताओं का निवास उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8 होता है। देश में किस तरह का अंधविश्वास फैलाया जा रहा है। कांगे्रस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि ध्यान नहीं दिया गया तो गुजरात में स्थिति विस्फोट हो सकती है क्योंकि दलित आत्महत्या का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह किया कि वह हाल की शर्मनाक घटना को सांप्रदायिक होने से रोके क्योंकि गुजरात में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि हम हमेशा से यह कहते आए हैं कि गुजरात माडल केवल कुछ उद्योगपतियों के लिए बनाया गया है।
उन्होंने (भाजपा ने) हमेशा समाज को बांट कर शासन किया है। गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल पीड़ितों से मिलने के लिए बुधवार को गर्इं जबकि जबकि इस घटना को घटे एक हफ्ते से अधिक समय हो गया है। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि गुजरात में दलित मामलों से निबटने के लिए विशेष अदालत के गठन में विलंब क्यों हुआ। पटेल ने मोदी सरकार के दलितों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बजट में एससी-एसटी मदों पर किए जाने वाले आवंटन की राशि में कमी की गई है।
भाजपा के विनय पी सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि ऐसी घटनाएं आंकड़ों के लिहाज से नहीं बल्कि वेदना की दृष्टि से देखी जानी चाहिए। हमें इन घटनाओं के मूल में जाकर देखना पड़ेगा कि ऐसी घटनाएं रुक क्यों नहीं पा रही हैं। उन्होंने कहा कि दलितों को हमारी सरकार समान दृष्टि से देखने की पक्षधर है। इसीलिए तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने सामाजिक कल्याण मंत्रालय का नाम बदल कर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय कर दिया था। नरेंद्र मोदी सरकार का मानना है कि यह वर्ग नौकरी मांगने वाला न होकर नौकरी देने वाला वर्ग बने। इसीलिए मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया जैसी पहल की गई हैं।
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि संविधान के लागू होने के लगभग 66 वर्षों के बाद केंद्र में 54 वर्षों तक कांग्रेस की और लगभग आठ वर्षों तक भाजपा की सरकार रहने के बावजूद दलित और आदिवासियों का उत्पीड़न बंद नहीं किया जा सका है। इसके अलावा भाजपा की बहुमत वाली वर्तमान सरकार होने के बाद भी लोकसभा में पदोन्नति में दलितों के आरक्षण संबंधी विधेयक पारित नहीं किया जा रहा है। पिछले डेढ़ सालों में गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों पर अत्याचार हुआ। अब दलितों पर भी अत्याचार हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न्याय सुनिश्चित करने के बजाए दलितों का मुंह बंद करने के लिए तमाम हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के दयाशंकर सिंह ने मेरेलिए जिस तरह की अमर्यादित और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया है, उससे दलित समाज के स्वाभिमान को ठेस लगी है। लोग अपना क्षोभ व्यक्त कर रहे हैं।
सपा के विश्वंभर प्रसाद निषाद ने कहा कि गुजरात की घटना शर्मनाक है और दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग सुरक्षित नहीं हैं। अन्नाद्रमुक के ए नवनीत कृष्णन ने कहा कि छुआछूत का उन्मूलन दलितों के सशक्तीकरण का एकमात्र तरीका है। माकपा के सीताराम येचुरी ने सत्तारूढ़ दल की मानसिकता पर सवाल उठाया तथा कहा कि उनकी करनी और कथनी में काफी फर्क है। उन्होंने कहा कि सरकार के एक मंत्री दलितों की तुलना कुत्तों से करते हैं और शिक्षा क्षेत्र के लोगों को निशाने पर लिया जाता है। पिछले वर्ष देश में 25 छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं प्रकाश में आई जिनमें 23 दलित थे क्योंकि उनके खिलाफ एक मानसिकता बनाई जा रही है।
आरएसएस प्रमुख आरक्षण नीति की समीक्षा की बात कर रहे हैं। वर्ष 2014 में दलितों पर हमले के मामले में 19 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है और इसकी संख्या 47,064 हो गई है। इसके अलावा इस संबंध में 1.23 लाख मामले सुनवाई के स्तर पर हैं जबकि दोष सिद्धि की दर पांच प्रतिशत से भी कम है जो दर वर्ष 2013 में 43 प्रतिशत थी।
चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने दलित छात्र रोहित वेमुला के मृत्यु पूर्व लिखे नोट की एक पंक्ति उद्धृत किया जिसमें लिखा था, हर बार जब एक दलित छात्र एक विश्वविद्यालय में आता है, उसे एक अच्छी सी रस्सी दें ताकि वह इससे खुद को फंदा लगा सके। सामाजिक न्याय एवं अधिकारित राज्य मंत्री रामदास अठावले ने चर्चा में हस्तक्षेप करते कहा कि दलितों के खिलाफ अत्याचार के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए बल्कि सभी को मिल जुल कर जाति व्यवस्था के खात्मे के लिए काम करना चाहिए।
