Yasin Malik: जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के पूर्व अलगाववादी नेता यासीन मलिक को 1990 में वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या के मामले में बड़ा झटका लगा है। दो प्रमुख चश्मदीदों ने जम्मू की एक आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) अदालत में गवाही दी, जिसमें यासीन मलिक की पहचान उस हमले के मुख्य शूटर के रूप में हुई, जिसमें स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना समेत वायुसेना के चार जवान मारे गए थे और 22 अन्य घायल हो गए थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक गवाह, जिससे यासीन मलिक ने जिरह की थी। उसने मलिक से कहा था, “आपकी दाढ़ी के स्टाइल को छोड़कर, आपमें ज्यादा बदलाव नहीं आया है, और मुझे आपको मुख्य शूटर के रूप में पहचानने में कोई कठिनाई नहीं है।”
मुख्य गवाह ने सन्नत नगर गोलीबारी में शामिल तीन अन्य आरोपियों शौकत बख्शी, नन्ना जी और जावेद अहमद की भी पहचान की। इस भयावह अनुभव को याद करते हुए गवाह ने अदालत को बताया कि नन्ना जी ने गोली चलाने के लिए एके राइफल उसकी ओर तान दी थी।
गवाह ने कहा, “वह गोलियां चलाना चाहता था, लेकिन मैंने अपनी स्थिति बदल ली और खुद को बचा लिया।” भयावह दृश्य का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने एक घायल अधिकारी को अस्पताल पहुंचाया।
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हमले के बाद की दर्दनाक स्थिति को उजागर करते हुए गवाह ने कहा, “अगले दिन ही हमें पता चला कि घायल अधिकारियों में से चार की मौत हो गई।”
यासीन मलिक, जो वर्तमान में आतंकी वित्तपोषण मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुआ। अदालत ने मुख्य गवाहों से जिरह की अनुमति दे दी है। सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष अभियोजक एस.के. भट मौजूद थे। इस मामले में अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी। एस.के.भट के नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने मलिक और अन्य आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत पेश किए हैं।
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