Who is Sergio Gor: अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक की टिप्पणी और ट्रंप के टैरिफ के बीच भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर भारत आए हैं। गोर (38) ने नवंबर के मध्य में भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में शपथ ली। शुक्रवार रात नई दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “भारत में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हमारे दोनों देशों के लिए आगे अपार अवसर हैं।”
भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभालने के बाद सर्जियो गोर ने सोमवार को कहा कि मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अगले महीने भारत को पैक्ससिलिका में पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं आज आपके साथ एक नई पहल भी साझा करना चाहता हूं जिसे अमेरिका ने पिछले महीने ही शुरू किया है, जिसका नाम पैक्ससिलिका है।
उन्होंने कहा कि पैक्ससिलिका अमेरिका के नेतृत्व वाली एक रणनीतिक पहल है जिसका मकसद महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा इनपुट से लेकर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, AI डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स तक एक सुरक्षित, समृद्ध और इनोवेशन-आधारित सिलिकॉन सप्लाई चेन बनाना है। पिछले महीने इसमें शामिल होने वाले देशों में जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और इज़राइल शामिल हैं। आज, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अगले महीने भारत को इस देशों के समूह में पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
सर्जियो गोर ने कहा कि आप में से कई लोगों ने मुझसे चल रही ट्रेड डील बातचीत के बारे में अपडेट मांगा है। दोनों पक्ष सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। दरअसल, ट्रेड को लेकर अगली बातचीत कल होगी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है इसलिए इसे फाइनल स्टेज तक पहुंचाना आसान काम नहीं है, लेकिन हम इसे पूरा करने के लिए पक्के इरादे से काम कर रहे हैं और हालांकि ट्रेड हमारे रिश्तों के लिए बहुत ज़रूरी है, हम सुरक्षा, काउंटर-टेररिज्म, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे दूसरे बहुत ज़रूरी क्षेत्रों में भी मिलकर काम करते रहेंगे।
सर्जियो को ट्रंप का खास माना जाता है, व्हाइट हाउस में भी उनकी अहम भूमिका रहती है। इससे पहले तक एरिक गार्सेटी भारत के लिए अमेरिका की तरफ से राजदूत बनाए गए थे, लेकिन 7 महीने से यह पद खाली चल रहा था। सर्जियो भारत में अमेरिका के 26वें राजदूत हैं।
कौन हैं सर्जियो गोर?
सर्जियो गोर माल्टा के एक छोटे से बंदरगाह शहर कोस्पिकुआ की तंग गलियों में पले-बढ़े। उस समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही लड़का एक दिन व्हाइट हाउस में बैठकर अमेरिकी नीतियां बनाने में भूमिका निभाएगा या दक्षिण एशिया जैसे अहम इलाके में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेगा।
आज 38 साल की उम्र में गोर एक बड़े राजनीतिक रणनीतिकार बन चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण व मध्य एशिया के लिए विशेष दूत के तौर पर नामित किया है। इसका मतलब है कि अब वे उस क्षेत्र को संभालेंगे जो अमेरिका की वैश्विक रणनीति के लिए बहुत अहम है।
गोर की पूरी यात्रा मेहनत, महत्वाकांक्षा और राजनीति में लगातार आगे बढ़ने की कहानी है। वह एक साधारण जगह से निकलकर आज वॉशिंगटन की सत्ता के केंद्र तक पहुंच चुके हैं।
सर्गेई गोरोखोव्स्की का जन्म 30 नवंबर 1986 को ताशकंद में हुआ था, जो उस समय सोवियत संघ का हिस्सा था। उनका बचपन एक जगह टिककर नहीं रहा, बल्कि वे लगातार अलग-अलग देशों में रहते रहे।
1994 में उनका परिवार उज्बेकिस्तान छोड़कर माल्टा चला गया। वहां उनकी मां ने अपना व्यवसाय शुरू किया और बाद में इज़रायली नागरिकता भी ले ली। सर्गेई बचपन से ही कई भाषाएं बोलना सीख गए। उन्होंने माल्टा में एक कैथोलिक लड़कों के स्कूल डी ला सैले कॉलेज में पढ़ाई की। इसके बाद परिवार ने फिर देश बदला। 1999 में वे अमेरिका के लॉस एंजिल्स आ गए, जहां से सर्गेई की जिंदगी का नया अध्याय शुरू हुआ।
अमेरिका पहुंचने के बाद सर्गेई गोरोखोव्स्की ने अपना नाम बदलकर सर्जियो गोर कर लिया। यहां वे एक ऐसे रूढ़िवादी (कंज़र्वेटिव) राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाने लगे, जो राजनीतिक संदेशों और मीडिया पर बहुत गहरी पकड़ रखते थे।
राजनीति और वाशिंगटन यूनिवर्सिटी
जब सर्जियो गोर ने जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू की, तब तक वे रूढ़िवादी विचारधारा अपना चुके थे। उनके लिए सीखने की जगह सिर्फ क्लासरूम नहीं, बल्कि पूरा वाशिंगटन डीसी बन गया था। जहां दूसरे छात्र लेक्चर में जाते थे, वहीं गोर विश्वविद्यालय में यंग अमेरिका फाउंडेशन की शाखा बनाने और कॉलेज रिपब्लिकन संगठन में अपनी भूमिका मजबूत करने में लगे रहते थे।
उनके शुरुआती साल काफी चर्चा में रहे। 2008 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने सबका ध्यान तब खींचा, जब उन्होंने बराक ओबामा के ACORN से संबंधों पर तंज कसने के लिए गिलहरी का बड़ा कॉस्ट्यूम पहनकर प्रदर्शन किया। इससे साफ हो गया था कि गोर राजनीति में ध्यान खींचने वाले तरीकों से अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटते।
कैपिटल हिल में प्रवक्ता
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद गोर ने छात्र राजनीति छोड़कर वॉशिंगटन के कैपिटल हिल में काम शुरू किया। वे रिपब्लिकन नेताओं स्टीव किंग (आयोवा) और मिशेल बाचमैन (मिनेसोटा) के प्रवक्ता बने। इससे उन्हें ओबामा सरकार के दौर की राजनीतिक बहसों को नज़दीक से देखने का मौका मिला।
2013 में गोर सीनेटर रैंड पॉल की राजनीतिक संस्था रैंडपैक में संचार निदेशक बने। अगले पांच सालों में वे पॉल के मुख्य प्रवक्ता और उप मुख्य कर्मचारी तक पहुंच गए। इस दौरान वे संदेश देने और मीडिया से बात करने में माहिर एक कुशल राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाने लगे।
हालांकि रास्ता हमेशा आसान नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके तेज और अलग-अलग तरह के आइडियाज- जैसे एक जीवित चील के साथ फोटो खिंचवाने का कार्यक्रम के कारण कई बार अभियान टीम के लोगों से उनके मतभेद भी हुए।
वफादारी और सत्ता संघर्ष
जब 2025 में डोनाल्ड ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बने, तब सर्जियो गोर को एक बहुत ताकतवर जिम्मेदारी दी गई। उन्हें राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय का प्रमुख बनाया गया। इस पद का काम था सरकार के हजारों पदों पर होने वाली नियुक्तियों को मंजूरी देना और यह देखना कि चुने गए लोग ट्रंप की नीतियों का समर्थन करते हों।
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लेकिन इतनी ताकत के साथ विवाद भी आए। खबरों के अनुसार, एलन मस्क और गोर के बीच नियुक्तियों को लेकर टकराव हुआ। आरोप लगा कि गोर ने नासा प्रमुख के लिए मस्क के पसंदीदा व्यक्ति को रोकने की कोशिश की। इसी नाराज़गी में मस्क ने सोशल मीडिया पर गोर को “सांप” कह दिया। इससे पता चलता है कि गोर ट्रंप के बेहद करीबी और असरदार लोगों में शामिल हो गए थे।
राजनीतिक कार्यकर्ता से लेकर राजनयिक तक
22 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सर्जियो गोर को भारत में अमेरिकी राजदूत और दक्षिण व मध्य एशिया के लिए विशेष दूत बनाने की घोषणा की। यह एक बहुत अहम जिम्मेदारी है, क्योंकि इस समय अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को नए तरीके से मजबूत करना चाहता है और इस क्षेत्र की अस्थिर स्थिति से निपटना चाहता है। गोर के लिए यह नियुक्ति उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ है। एक समय कॉलेज में राजनीति करने वाला युवक, आज अमेरिका की विदेश नीति में बड़ी भूमिका निभाने वाला व्यक्ति बन गया है।
निष्ठा और रणनीति से परिभाषित करियर
सर्जियो गोर का सफर वाशिंगटन में सत्ता के नए समीकरणों को दर्शाता है। जहां वफादारी, मीडिया की समझ और राजनीतिक सूझबूझ ताशकेंट के एक अप्रवासी छात्र को वैश्विक कूटनीति के गलियारों तक पहुंचा सकती है। भारत में उनका अगला कदम अमेरिकी प्रभाव को मजबूत करेगा या नए विवादों को जन्म देगा, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा, लेकिन एक बात निश्चित है कि सर्जियो गोर का नाम सुर्खियों में बना रहेगा।
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