Indore Water Contamination: भागीरथपुरा की संकरी, भीड़भाड़ वाली गलियों में इंजीनियरों की टीमें समय के साथ-साथ इस चिंताजनक संभावना से भी जूझ रही हैं कि वे अभी भी पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए हैं कि इंदौर शहर की जल आपूर्ति में यह प्रदूषण कैसे पहुंचा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ हुई हाई लेवल मीटिंग के बाद विपक्ष के हमलों और भारतीय जनता पार्टी की ओर से हो रही अंदरूनी आलोचना के बढ़ते दबाव के चलते, मध्य प्रदेश भर के नगर निगम अधिकारियों को वाटर सप्लाई सिस्टम का सही रखरखाव, वाटर क्वालिटी की लगातार निगरानी और पाइपलाइन रिसाव का समय पर पता लगाने को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
इंदौर में इस निर्देश के बाद शहर भर में इसके सोर्स का पता लगाने का अभियान चलाया गया है। इसमें सब-इंजीनियरों से लेकर एरिया इंजीनियर तक, स्वास्थ्य अधिकारियों से लेकर कई सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ऑफिस के कर्मचारियों तक 200 कर्मी शामिल है। यह पूरे शहर में फैल गए हैं। शुरुआती जांच सीधी-सादी लग रही थी। बाथरूम में उचित सेप्टिक टैंक नहीं था, इसलिए दूषित अपशिष्ट एक गड्ढे में जमा हो गया, जिसके कारण टूटे हुए पानी के पाइप से संक्रमण फैल गया।
इस जांच की देखरेख कर रहे एक एरिया इंजीनियर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “पहले हमें लगा था कि संक्रमण स्थानीय पुलिस चौकी में बने टॉयलेट से फैला है। हालांकि, यह भी एक कारण हो सकता है, लेकिन हम इस मामले के अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रहे हैं।” इंजीनियर ने बताया, “शहर में कुल 105 पानी के टैंकर हैं जो लोगों को पानी की आपूर्ति करते हैं। अगर प्रदूषण व्यापक होता, तो पूरे शहर के पानी के टैंकरों में इसका पता चल जाता, लेकिन यह केवल भागीरथपुरा में ही देखा गया है। इसलिए गहन जांच की जरूरत है।” नगरपालिका अधिकारी आगे की जांच के लिए इस पाइपलाइन पर हेवी मेटल टेस्ट कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें: जहरीला पानी, बढ़ते मरीज और दबाव में स्वास्थ्य सेवाएं
जांच का सबसे साफ दिखने वाला और सबसे मेहनत वाला हिस्सा वह होता है, जब टीमें शहर के सीवर के गड्ढों में एक-एक करके नीचे उतरती हैं। वहां वे यह देखते हैं कि कहीं से रिसाव तो नहीं हो रहा है या कोई ढांचा टूटा तो नहीं है, जिससे गंदा पानी आसपास की साफ पानी की पाइपों में मिल सकता है।
कुल 1000 चैंबरों को कवर करने का टारगेट है- सब इंजीनियर
भागीरथपुरा इलाके में तैनात एक सब-इंजीनियर ने बताया, “शहर के सीवरेज सिस्टम के एंट्री गेट यानी एक चैंबर की सफाई में रिसाव के संकेतों की जांच करने में एक टीम को 20 मिनट लगते हैं। कुल 1000 चैंबरों को कवर करने का टारगेट है और टीम को इसे पूरा करने में कुछ समय लगेगा।” इंजीनियरों ने कहा कि भागीरथपुरा में हर तरफ जटिलताएं हैं। यह इलाका मुश्किल से 8 फीट चौड़ी गलियों का एक भूलभुलैया है, जहां वाहन गुजर नहीं सकते और डिवाइस को हाथ से ले जाना पड़ता है।
एक सब-इंजीनियर ने कहा, “संकरी सड़कों वाले इलाके में निजी विक्रेताओं द्वारा किए गए चैंबर के काम का पता लगाना भी मुश्किल हो रहा है।” उन्होंने कहा, “हम ब्रॉडबैंड लाइनें भी खोद रहे हैं। हम किसी भी संभावना को नहीं छोड़ रहे हैं।” कुछ टीमें अंडरग्राउंड काम कर रही हैं, वहीं एक अन्य दल शहर के 105 पानी के टैंकरों पर ज्यादा फोकस कर रहा है। एक असिस्टेंट इंजीनियर ने कहा, “हम इन सभी पानी के टैंकरों में पानी की क्लोरीन मात्रा और बैक्टिरियल इंफेक्शन की जांच कर रहे हैं।”
एक नगर पालिका इंजीनियर ने बताया, “घनी आबादी वाले क्षेत्रों और 20 साल से ज्यादा पुरानी पाइपलाइनों की पहचान की जानी है, साथ ही उन पाइपलाइनों की भी पहचान की जानी है जो नालियों और सीवर लाइनों के करीब या नीचे से गुजरती हैं।” स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 24 दिसंबर से अब तक कुल 310 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 203 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, 107 को छुट्टी दे दी गई है और 25 आईसीयू में हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने शुक्रवार को इलाके में पानी के टैंकर भेजने का आदेश दिया था, क्योंकि शिकायतें मिली थीं कि वाहन इलाकों के पास नहीं पहुंच रहे थे।
जमीन पर क्या हैं हालात?
शनिवार को बोतलें और बाल्टियां लिए महिलाओं का एक ग्रुप पीने का पानी लेने के लिए कतार में खड़ा था। कुछ महिलाएं पानी की क्वालिटी को लेकर शिकायत कर रही थीं, जबकि अन्य बड़ी बोतलें खरीदने के लिए स्थानीय दुकानों की ओर चल पड़ीं। कई मोहल्लों में इसी तरह के दृश्य देखने को मिले।
इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने लोगों को पानी दिए जाने से पहले एक टैंकर से पानी पिया, जो इस बात का संकेत है कि सब कुछ ठीक है। भागीरथपुरा की कॉलोनी में रहने वाले राहुल ने कहा, “हम हर सुबह पीने का पानी खरीदते हैं। टैंकर हर दिन आता है, लेकिन हमें नहीं पता कि पानी कैसा है। पिछले कुछ दिनों से मैंने जो कुछ खाया है, उसके बारे में मुझे अभी भी ठीक से पता नहीं है।”
सात दिनों से नल का पानी भी बंद- किशोर
इंदौर नगर निगम में काम करने वाले किशोर ने बताया कि पिछले सात दिनों से नल का पानी भी बंद है। किशोर ने कहा, “मेरा बेटा तीन साल का है और वह भी शनिवार को बीमार पड़ गया। अधिकारियों ने जमीन खोद दी है, इसलिए हम टैंकरों पर निर्भर हैं। मैं तो वह पानी पी सकता हूं, लेकिन मेरे बच्चों के लिए वह पीने लायक नहीं है। हम या तो उसे उबाल रहे हैं या उनके लिए पानी खरीद रहे हैं।”
ये भी पढ़ें: कहीं पीने का पानी नहीं, कहीं बर्बादी और कहीं परोसा जा रहा जहर; चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को बधाई!
इसी बीच, भागीरथपुरा की सड़कों पर विपक्षी कांग्रेस के नेता प्रदर्शनकारी भीड़ से भिड़ते नजर आए। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक जांच दल का गठन किया है। इसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी शामिल थे, प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प से पहले एक परिवार से मिलने में कामयाब रहा। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने कहा कि उनके दौरे का विरोध करने वाले बीजेपी कार्यकर्ता थे।
भागीरथपुरा की हालत बहुत खराब है- सज्जन वर्मा
वर्मा ने कहा, “भागीरथपुरा की हालत बहुत खराब है। उन्हें प्रत्येक पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये देने चाहिए। यह घटना पूरी दुनिया में देखी जा रही है, कि उन्होंने उस शहर का क्या हाल कर दिया है जिसे हमने बनाया था।” बीजेपी प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा कि प्रदर्शनकारी उनकी पार्टी के नहीं थे। उन्होंने कहा, “अगर स्थानीय भीड़ ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, तो यह उनकी राजनीति का खंडन है। हमारे कार्यकर्ता राहत कार्यों में मदद के लिए मौके पर मौजूद हैं।” एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंतोदिया ने कहा, “कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमने 40-45 लोगों को एहतियाती हिरासत में लिया है। दो गुट आपस में भिड़ने वाले थे और हमें हस्तक्षेप करना पड़ा।”
ये भी पढ़ें : ‘ऐसे पापों का या तो प्रायश्चित या दंड’, इंदौर मौत मामले पर उमा भारती ने मोहन सरकार से पूछे कई सवाल
