यूपी के पूर्व सीएम ​अखिलेश यादव की सरकार में बेहद करीबी माने जाने वाले आईएएस जुहैर बिन सगीर अब संकट में हैं। यूपी के सतर्कता आयोग ने आईएएस जुहैर बिन सगीर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए दो जिलों में एफआईआर दर्ज करवाई है। आईएएस सगीर के खिलाफ यूपी के मुरादाबाद और आगरा में भी मामले दर्ज किए गए हैं। सगीर पर आगरा और मुरादाबाद में तैनाती के दौरान अपनी बहन को सर्वेक्षित भूमि में से जमीन खरीदवाने और लाभ लेने का आरोप है। ये जमीन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के पास फतेहाबाद गांव में पड़ती है।

कृषि उत्पादन विभाग में विशेष सचिव (लघु सिंचाई) जुहैर बिन सगीर के खिलाफ मंगलवार (24 अक्टूबर) को मुरादाबाद के दो थानों में एफआईआर दर्ज करवाई गई। ये शिकायत बरेली के विजिलेंस विभाग ने सिविल लाइंस थाने में दर्ज करवाई है। एफआईआर में पूर्व तहसीलदार सदर संजय कुमार, अर्बन सीलिंग विभाग के सहायक अभियंता सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता, कनिष्ठ लिपिक हरवेंद्र कुमार व रीता सिंह, पेशकार इंद्रजीत सिंह, भूमि कब्जाने की आरोपी नसीमा बानो के नाम दर्ज हैं।

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आईएएस जुहैर बिन सगीर के खिलाफ आगरा के फतेहाबाद थाने में दर्ज एफआईआर। फोटो- आशु प्रज्ञ मिश्र।

इसके अलावा मूंढापांडे थाने में विजिलेंस ने दूसरा मामला कायम करवाया है। ये मामला जेल की भूमि में घोटाले के आरोप में दर्ज करवाया गया है। इस मामले में मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम जुहैर बिन सगीर और तत्कालीन एडीएम सिटी अरुण श्रीवास्तव के अलावा संजय कुमार, राजस्व निरीक्षक परवेज खां, लेखपाल सुभाष चंद्र शर्मा के साथ ही सौरभ जैन, सौम्य जैन और जुल्फिकार अली को भी नामजद किया गया है। एडीएम अरुण कुमार श्रीवास्तव मुरादाबाद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बाकी आरोपी अभी मुरादाबाद में तैनात हैं।

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आईएएस जुहैर बिन सगीर के खिलाफ आगरा के फतेहाबाद थाने में दर्ज एफआईआर। फोटो- आशु प्रज्ञ मिश्र।

विजिलेंस ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने पद का दुरुपयोग कर मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की 68 हजार वर्ग मीटर जमीन को फर्जी दस्तावेज तैयार कर निजी खाता धारकों को सौंप दिया। ये घोटाला 28 मई 2016 से 23 मई 2017 के बीच हुआ। इन अफसरों ने सीलिंग के कुल 15 मुकदमों पर अवैध रूप से फैसला लेकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। वहीं डीएम मुरादाबाद के पद पर तैनाती के दौरान सगीर ने नसीमा बानो को जमीन दिलवाकर 20.45 लाख रुपये का लाभ भी लिया था।

यूपी के आगरा जिले में आईएएस ​जुहैर बिन सगीर साल 2013 में डीएम के पद पर तैनात थे। उस वक्त के भ्रष्टाचार के मामले में भी बरेली की विजिलेंस टीम ने आगरा के फतेहाबाद थाने में आईएएस जुहैर बिन सगीर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में मुकदमा दर्ज करवाया है।आगरा के फतेहाबाद थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार आईएएस अधिकारी जुहैर बिन सगीर ने अपनी मौसेरी बहन खालिदा रहमान को लखनऊ एक्सप्रेस वे के लिए सर्वेक्षित जमीन में से फतेहाबाद के दो गांवों में जमीन खरीदवाई थी। साल 2013 से 14 तक आगरा में जिलाधिकारी रहने के कारण सगीर को जमीन के अधिग्रहण के बारे में जानकारी थी। इसकी अधिसूचना भी वर्ष 2013 में जारी की गई थी।

डीएम जुहैर बिन सगीर के खिलाफ मोर्चा खोलने का श्रेय मुरादाबाद के अधिवक्ता दुष्यंत चौधरी को जाता है। दुष्यंत चौधरी ने 13 अप्रैल 2017 को मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सरकार से शिकायत की थी। आरोपों की जांच के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में जांच कमिटी गठित हुई। तीन सदस्यीय जांच समिति ने 13097.17 वर्ग मीटर सीलिंग की जमीन छोडऩे के मामले में डीएम, एडीएम सिटी के साथ आठ को आरोपी बनाया था। शासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस को फिर से जांच करने का आदेश दिया था। 12 जुलाई 2017 को बरेली विजिलेंस विभाग के अफसरों ने जांच शुरू की। दो साल की लंबी जांच के बाद इन सभी आरोपितों के खिलाफ शासन के निर्देश पर मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की गई है।