राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के राम मंदिर को लेकर दिए बयान के बाद अब विश्व हिंदू परिषद मोदी सरकार से आमने सामने के मूड में है। दशहरा पर भागवत ने कहा था कि सरकार राम मंदिर के लिए बिल लाए। हालांकि इस पर भारतीय जनता पार्टी के के वरिष्ठ नेताओं ने इशारों में कहा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगी। बीते कुछ दिनों में विहिप और आरएसएस इस मुद्दे को लगातार उठा रही है। भागवत का मंदिर पर सरकार को सलाह एक कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। लेकिन अब विहिप ने मोदी सरकार और बीजेपी के ‘घर’ पर जाकर राम की याद दिलाएगी।

ईटी की खबर के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद 15 नवंबर से देशभर में भारतीय जनता पार्टी के सांसदों के घर जाकर मंदिर के वादे की याद दिलाएगी। इस पर विहिप के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि, राम मंदिर निर्माण के लिए कानून या अध्यादेश की मांग हाल के दिनों में जोर से हो रही है। हमें विश्वास है कि यह राम भक्तों की एक पार्टी है। विहिप राम मंदिर के लिए अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठनों से मिलकर सरकार पर बिल लाने का दबाव डलवाएगी।

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इससे पहले गुरुवार (18 अक्टूबर) को महाराष्ट्र के नागपुर में संगठन के विजयदशमी उत्सव पर आरएसएस चीफ ने कहा था कि, चाहे जो हो, अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए। राम हमारे गौरव पुरुष हैं, उनका स्मारक होना ही चाहिए। सरकार इसे बनाने के लिए कानून लाए। संघ इस मसले पर साधु-संतों के फैसले के साथ हैं।

भागवत के दिए इस बयान पर केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा, करोड़ों हिंदुस्तानियों की राम मंदिर से भावनाएं जुड़ी हुई हैं। बीजेपी ने राम मंदिर का जिक्र मैनिफैस्टो में किया था।