भारतीय रेलवे ने साल 2030 तक मौजूदा समय में चल रही वंदे भारत ट्रेन की संख्या को पांच गुना बढ़ाकर 800 करने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा समय में दिसंबर 2025 तक 164 वंदे भारत सेवाएं चालू की जा चुकी थीं। इनकी मदद से 274 जिलों में रेल सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। इन ट्रेनों में अभी तक 7.5 करोड़ से अधिक यात्रियों ने यात्रा की है।

रेलवे अधिकारी ने बताया कि साल 2019 में शुरू हुए वंदे भारत सेवाओं का राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पर तेजी से विस्तार हुआ है। इसे आने वाले दशकों में भारत के यात्री रेल आधुनिकीकरण के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। रेलवे ने 2047 तक वंदे भारत के बेड़े को लगभग 4500 ट्रेन सेट तक बढ़ाने की योजना बनाई है।

वहीं मध्यम अवधि में आधारभूत संरचना की तैयारी और विनिर्माण क्षमता के आधार पर 2030 तक लगभग 800 वंदे भारत ट्रेन सेट चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इन ट्रेनों को आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है। कई गलियारे पर इनकी मदद से यात्रा के समय में 45 फीसद तक की कमी आई है।

इन ट्रेनों की साल 2024-25 में अधिभोग 102.01 फीसद थी और 2025-26 में (जून 2025 तक) यह बढ़कर 105.03 फीसद हो गई। रेलवे अधिकारी ने बताया कि वंदे भारत 2.0, वंदे भारत 3.0 के बाद वंदे भारत 4.0 को अगले साल से लागू किया जाएगा। इसमें कवच 5.0 को शामिल करने की योजना है। वैसे इसके अलावा लंबी दूरी की यात्रा ट्रेन से कम समय में पूरा करने का लोगों का सपना जल्द पूरा होने वाला है, क्योंकि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि केरल सहित भारत के सभी राज्यों को वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें उपलब्ध कराई जाएंगी।

रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि फिलहाल कई राज्यों में वंदे भारत चेयर कार ट्रेनों का संचालन हो रहा है और अब अगला कदम स्लीपर वर्जन को पूरे देश में विस्तार देना है। इसके लिए रेलवे उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है, जिससे सभी राज्यों को जल्द से जल्द स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें दी जा सकेंगे।