त्रिपुरा के विधानसभा अध्यक्ष रतन चक्रवर्ती ने सत्तारूढ़ भाजपा विधायक आशीष दास को बुधवार को औपचारिक रूप से अयोग्य घोषित कर दिया। अनुसूचित जाति के नेता दास (43) पिछले साल 31 अक्टूबर को यहां तृणमूल में शामिल हो गए थे। असेंबली स्पीकर चक्रवर्ती ने कहा कि दास विधायक के वेतन और भत्तों सहित सभी सुविधाओं से वंचित रहेंगे।
स्पीकर ने कहा कि उन्हें भाजपा की मुख्य सचेतक कल्याणी रॉय से दास के खिलाफ शिकायत मिली थी। इसमें उनके पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया गया था। विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि सभी कानूनी पहलुओं पर गौर करने के बाद उन्होंने बुधवार को विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया। उनका कहना है कि नियमों के तहत फैसला लिया गया है। इसके पीछे किसी भी तरह का राजनीतिक द्वेष नहीं है।
उधर, आशीष दास ने कहा कि विधानसभाध्यक्ष का फैसला अनुचित है। उन्होंने कहा- विधानसभाध्यक्ष मुझे अयोग्य घोषित नहीं कर सकते। मैं कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लूंगा और कानूनी समाधान की तलाश करूंगा। दास उन सात विधायकों में से शामिल थे जिन्होंने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को हटाने की मांग करते हए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। विधायकों ने देब को तानाशाह और अलोकप्रिय बताया था।
गौरतलब है कि आशीष दास को अयोग्य साबित करने से ममता की पार्टी को भी झटका लगा है। तृणमूल तेजी से त्रिपुरा में अपना आधार बढ़ा रही है। हालांकि, बिप्लब देव की सरकार भी ममता को हताश करने के लिए सारी कवायदें कर रही है। कभी ममता के लोगों को कोरोना के नाम पर रोका जाता है तो कभी उन पर हमले भी कराए जाते हैं।
हाल ही में ममता के कई नेताओं को त्रिपुरा आने से रोका गया। कई बार उन की रैलियां भी रद्द कराई गईं। एक महिला नेता को तो बाकायदा पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया था। उन पर सीएम के खिलाफ साजिश करने का आरोप लगा था। तूल पकड़ने पर उन्हें छोड़ा गया।
