सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियोजन और सबूतों, दोनों के लिहाज से उमर खालिद और शरजील इमाम की स्थिति अन्य 5 आरोपियों की तुलना में अलग है। कथित अपराधों में इन दोनों की केंद्रीय (मुख्य) भूमिका रही है। इन दोनों की हिरासत (ज्यूडिशियल कस्टडी) की अवधि भले ही लंबी रही हो, लेकिन यह न तो संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है और न ही संबंधित कानूनों के तहत लगे वैधानिक प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करती है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है।

तेज प्रताप यादव ने कहा, “जो दोषी होगा उसके ऊपर कार्रवाई होना लाजिमी है। जो दंगा, हत्या और बलात्कार करेगा तो ऐसे लोगों को क्यों छोड़ा जाए?”

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दरअसल, उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से तिहाड़ में हैं। इन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था।

उमर जमानत के लिए निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक 6 बार याचिका लगा चुका है। दिल्ली में फरवरी, 2020 में हिंसा भड़की थी। इसमें 53 लोगों की मौत हुई थी। 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 750 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं।

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