सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (16 अक्टूबर 2019) को केंद्र की मोदी सरकार को कश्मीर में बंद और हिरासत पर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि सरकार उन आदेशों को पेश करें जिनके आधार पर राज्य में प्रतिबंध लगाए गए हैं। कश्मीर टाइम्स की एडिटर अनुराधा भसीन की याचिका पर जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह निर्देश जारी किए। भसीन ने अपनी याचिका में कश्मीर में जारी प्रतिबंधों पर रोक लगाने की मांग की है।
पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंध लगाने से संबंधित आदेशों को रिकॉर्ड पर क्यों नहीं रखा गया। क्या यह उद्देश्यपूर्ण तरीके से किया गया है? इस पर तुषार मेहता ने कहा कि जमीन पर हालात लगातार बदल रहे हैं। हम आदेशों को रिकॉर्ड पर रखेंगे लेकिन इन रिकॉर्ड्स को कोर्ट के अलावा कोई और शख्स न देखें विशेषकर याचिकाकर्ता तो बिल्कुल नहीं। क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद ही अहम है। हम पीठ के अध्ययन के लिए रिकॉर्ड्स को पेश करेंगे।
वहीं राज्य में संचार पर लगाए गए प्रतिबंधों पर तुषार मेहता ने बताया कि ‘संचार पर लगाए गए प्रतिबंधों संबंधी परिस्थितियों में बदलाव आया है और वह इस मामले में ताजा जानकारी देते हुए एक शपथपत्र दायर करेंगे।
पीठ ने जब घाटी में मोबाइल सेवाएं बहाल होने की मीडिया रिपोर्टों का जिक्र किया तो याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि केवल पोस्टपेड मोबाइल चल रहे हैं लेकिन प्राधिकारियों ने मंगलवार को एसएमएस सेवाएं रोक दी थीं। वहीं कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई अब 25 अक्टूबर को करेगी। पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बी आर गवई शामिल हैं।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से कश्मीर में लगातार 73वें दिन बुधवार को भी मुख्य बाजार बंद रहने और सार्वजनिक वाहनों से सड़कों से नदारद रहने के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत मुख्य धारा के कई नेता अब भी नजरबंद या हिरासत में हैं।

