सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई (CJI GAVAI) का शुक्रवार को आखिरी कार्यदिवस था। चीफ जस्टिस बीआर गवई 23 नवंबर को रिटायर होंगे। इस मौके पर उनके लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया था, जहां उन्होंने भाषण दिया। उनका करियर करीब चार दशक तक रहा। चीफ जस्टिस बीआर गवई ने अपने विदाई समारोह के दौरान एक रस्मी पीठ के सामने कहा कि आप सभी को सुनने के बाद और खासकर अटॉर्नी जनरल (आर वेंकटरमणि) और कपिल सिब्बल की कविताओं और आप सभी की गर्मजोशी भरी भावनाओं को जानने के बाद, मैं भावुक हो रहा हूं। पीठ में नियुक्त हुए नए CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विनोद चंद्रन भी थे।

अपने ही समुदाय की नाराजगी झेलनी पड़ी- जस्टिस गवई

वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित एक अन्य विदाई समारोह में चीफ जस्टिस बीआर गवई ने अपने एक फैसले के कारण अपने ही समुदाय से मिली नाराजगी को याद किया, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जातियों (SC) की क्रीमी लेयर को भी प्रवेश और नौकरियों में आरक्षण के लाभ से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “संविधान का एक उत्साही विद्यार्थी होने के नाते, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के गुण हमेशा मेरे दिल के करीब रहे हैं।” उन्होंने 2021 न्यायाधिकरण सुधार कानून के प्रमुख प्रावधानों को रद्द करने के अपने हालिया ऐतिहासिक फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान का मूल ढांचा है और न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता।

अमरावती जैसे छोटी जगह और साधारण पृष्ठभूमि से टॉप तक की अपनी यात्रा को याद करते हुए जस्टिस गवई ने कहा कि संविधान और उनके माता-पिता के मूल्यों ने इसे संभव बनाया। वह के जी बालकृष्णन के बाद भारतीय न्यायपालिका के पहले बौद्ध और दूसरे दलित चीफ जस्टिस हैं। चीफ जस्टिस ने कहा, “जब मैं इस अदालत कक्ष से आखिरी बार निकल रहा हूं तो पूरी संतुष्टि के साथ निकल रहा हूं, इस संतोष के साथ कि मैंने इस देश के लिए जो कुछ भी कर सकता था, वह किया है… धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद।”

‘मैं बौद्ध धर्म का पालन करता हूं, लेकिन…’, धार्मिक मान्यता को लेकर सीजेआई गवई ने कही बड़ी बात

सीजेआई गवई ने कहा, “मेरा हमेशा से मानना है कि हर कोई, हर न्यायाधीश, हर वकील, उन सिद्धांतों से चलता है जिन पर हमारा संविधान काम करता है, यानी बराबरी, न्याय, आज़ादी और भाईचारा। मैंने संविधान के दायरे में रहकर अपना कर्तव्य अदा करने की कोशिश की, जो हम सभी को बहुत प्यारा है।”

चीफ जस्टिस बीआर गवई ने 14 मई को चीफ जस्टिस के तौर पर छह महीने से अधिक कार्यकाल के लिए शपथ ली थी। वह 23 नवंबर 2025 को पद छोड़ेंगे और शुक्रवार उनका आखिरी कार्य दिवस था। अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए CJI गवई ने कहा, “जब मैं 1985 में (कानून के) पेशे में आया, तो मैंने लॉ स्कूल में एडमिशन लिया। आज जब मैं पद छोड़ रहा हूं, तो मैं न्याय के एक छात्र के तौर पर पद छोड़ रहा हूं।”

गवई ने एक वकील से हाई कोर्ट के जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस और आखिर में भारत के चीफ जस्टिस बनने के अपने 40 साल से ज़्यादा के सफर को बहुत संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि हर पद को ताकत के तौर पर नहीं, बल्कि समाज और देश की सेवा करने के मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए। डॉ. बी. आर. आंबेडकर और अपने पिता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका न्यायिक दर्शन आर्थिक और राजनीतिक न्याय के लिए आंबेडकर की प्रतिबद्धता पर आधारित है। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा मौलिक अधिकारों को राज्य नीति के दिशानिर्देशक सिद्धांत साथ संतुलित करने की कोशिश की। मेरे कई फैसलों ने संवैधानिक स्वतंत्रता का सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण जरूरतों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश की। पर्यावरण के मामले मेरे दिल के करीब रहे हैं।

जस्टिस सूर्यकांत ने गवई की तारीफ की

चीफ जस्टिस बीआर गवई की तारीफ करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “वह एक सहकमी से कहीं ज़्यादा रहे। वह मेरे भाई और विश्वस्त हैं, और बहुत ईमानदार इंसान हैं। उन्होंने धैर्य और गरिमा के साथ मामलों को संभाला। उन्होंने युवा वकीलों को हिम्मत दी। उनकी सख्ती हमेशा हास्य से भरी होती थी। एक भी दिन ऐसा नहीं जाता था जब वह उन्होंने किसी हठी वकील को जुर्माना लगाने की धमकी न दी हो, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।”

अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने भूषण का अर्थ आभूषण या साज-सज्जा बताते हुए कहा कि जस्टिस गवई ने न्यायपालिका और कानून की दुनिया को सजाया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उनसे एक न्यायाधीश के तौर पर हुई मुलाकात को याद करते हुए कहा, “आप एक इंसान के तौर पर कभी नहीं बदले।”