छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों के साथ शनिवार को दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 नक्सली मारे गए। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सुरक्षाबलों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सटीक रणनीति, सतत दबाव और मजबूत जमीनी पकड़ के चलते यहां माओवादी नेटवर्क तेजी से ढह रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों ने सुकमा जिले में 12 नक्सलियों तथा पड़ोसी जिले बीजापुर में दो अन्य नक्सलियों को मार गिराया। उन्होंने बताया कि बीजापुर और सुकमा जिलों के दक्षिणी क्षेत्रों में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने तलाश अभियान शुरू किया।

सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि शुक्रवार रात जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) ने यह अभियान शुरू किया था और सुबह करीब लगभग आठ बजे किस्टाराम इलाके के जंगल में गोलीबारी शुरू हो गई। उन्होंने बताया, ‘‘मुठभेड़ स्थल से 12 नक्सलियों के शव और हथियार बरामद किए गए हैं।’’ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, मारे गए अधिकांश नक्सली माओवादियों की कोंटा क्षेत्र समिति के थे। अधिकारी के अनुसार, मारे गए नक्सलियों में से एक मंगडू बताया जा रहा है, जो उसी संगठन का सचिव था।

चव्हाण ने बताया कि मंगडू इलाके में सक्रिय एक प्रमुख कैडर था और वह कई माओवादी घटनाओं में लिप्त था, जिसमें पिछले साल जून में कोंटा इलाके में एक बारूदी सुरंग विस्फोट की घटना भी शामिल है। इस घटना में तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (कोंटा) आकाश राव गिरेपुंजे की जान चली गई थी।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बीजापुर में एक अलग अभियान के दौरान, जिले के दक्षिणी इलाके के एक जंगल में सुबह करीब पांच बजे मुठभेड़ हुई। उन्होंने बताया कि घटनास्थल से दो नक्सलियों के शव, एके-47, इंसास और एसएलआर राइफल सहित हथियारों का जखीरा बरामद किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, मारे गए नक्सलियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। मुख्यमंत्री साय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘विश्वास, विकास और सुरक्षा ही बस्तर की नयी दिशा, जहां हिंसा नहीं, अब शांति ही एकमात्र विकल्प। बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने निर्णायक सफलता हासिल करते हुए 14 माओवादियों को ढेर कर दिया गया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षाबलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मज़बूत जमीनी पकड़ के चलते यहां माओवादी नेटवर्क तेजी से ढह रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बस्तर अब भरोसे, विकास और सुरक्षा के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन, गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता, सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति और जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार का संदेश स्पष्ट है- जो अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण करें, पुनर्वास नीति अपनाये और सम्मान के साथ मुख्यधारा में लौटें। अन्यथा सरकार और सुरक्षा बल अपने दायित्व का निर्वहन करने को पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात का अंतिम चरण है, अब बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।’’ पिछले साल छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में 285 नक्सली मारे गए थे। केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की है।

कमांडर बदसे सुक्का के नेतृत्व में 20 माओवादियों ने तेलंगाना पुलिस के सामने किया सरेंडर

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी (भाकपा-माओवादी) के शीर्ष कमांडर बदसे सुक्का उर्फ ​​देवा ने संगठन के 19 भूमिगत लड़ाकों के साथ तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। इस घटनाक्रम को पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) और भाकपा (माओवादी) की तेलंगाना राज्य समिति के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

तेलंगाना पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने पीएलजीए के “हथियारों और गोला-बारूद के भंडार” भी सौंप दिए। विज्ञप्ति के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में संगठन का एक अन्य वरिष्ठ कमांडर कंकनला राजी रेड्डी उर्फ ​​वेंकटेश भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि राजी रेड्डी 2003 में भाकपा-माले पीडब्ल्यूजी (पीपुल्स वॉर ग्रुप) में शामिल हुआ था और उसे सैन्य रणनीति बनाने, विस्फोटक तैयार करने, आग्नेयास्त्र निर्माण, आईईडी लगाने में महारत हासिल थी।

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विज्ञप्ति में कहा गया है कि बदसे भाकपा (माओवादी) का एक खूंखार रणनीतिकार था और उसने कई बड़े हमलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें 2013 का झीरम घाटी हमला भी शामिल है, जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और अन्य कांग्रेस नेताओं की मौत हो गई थी। इसमें कहा गया है कि बदसे पर 75 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

विज्ञप्ति के मुताबिक, राजी रेड्डी ने छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टालू की पहाड़ियों में एक गुरिल्ला अड्डा स्थापित करने और वहां मौजूद लड़ाकों को रसद सहायता मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाई थी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले 20 माओवादियों को राज्य और केंद्र की राहत एवं पुनर्वास नीति के तहत कुल 1.82 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। इसमें कहा गया है कि तेलंगाना राज्य पुलिस विभाग ने आश्वासन दिया है कि सभी पात्र लाभ जल्द से जल्द प्रदान किए जाएंगे, जिससे आत्मसमर्पण करने वाले लड़ाकों को सम्मान और सुरक्षा के साथ नये सिरे से जीवन जीने में मदद मिलेगी।

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