पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से की जा रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया का जबरदस्त शोर है लेकिन ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का फोकस विधानसभा चुनाव पर है। पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल 2026 में विधानसभा के चुनाव होने हैं।
टीएमसी का कहना है कि एसआईआर का सबसे ज्यादा असर मतुआ समुदाय (अनुसूचित जाति) पर हुआ है। मतुआ समुदाय के लोग मूल रूप से बांग्लादेश के हैं और पश्चिम बंगाल के बॉर्डर वाले जिलों में रहते हैं।
टीएमसी का कहना है कि एसआईआर का असर मतुआ समुदाय के अलावा राज्य में रहने वाले अल्पसंख्यकों और बंगाल के उत्तरी और पश्चिमी इलाकों में रहने वाले आदिवासियों पर भी होगा।
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टीएमसी के एक सीनियर नेता कहते हैं, “2019 के लोकसभा चुनाव के बाद हमने मतुआ और आदिवासी खासकर राजबंशी वोट बैंक का बड़ा हिस्सा खो दिया। इसका असर उत्तर बंगाल, उत्तर 24 परगना, नादिया और बंगाल के पश्चिमी हिस्सों के चुनाव नतीजों पर पड़ा। 2021 के विधानसभा चुनाव में हालांकि हमने फिर से सरकार बनाई लेकिन इन इलाकों में हम कई सीटें हार गए। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में हम उन सीटों को फिर से जीतने की कोशिश करेंगे।”
टीएमसी नेता कहते हैं कि एसआईआर की प्रक्रिया के बीच ही उन्होंने मतुआ समुदाय से संपर्क साधा है और उन्हें उम्मीद है कि उत्तर बंगाल में टीएमसी फिर से मजबूत होगी। उत्तर बंगाल में ही बड़ी संख्या में बांग्लादेश से लोग आए थे।
टीएमसी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय की आबादी लगभग 17% है और राज्य की 292 विधानसभा सीटों में से लगभग 30 पर इस समुदाय की अच्छी-खासी मौजूदगी है। मतुआ समुदाय का कहना है कि उनकी आबादी लगभग 20% आबादी है और 40-45 सीटों पर उनका असर है।
ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने के लिए ये है भाजपा का प्लान
ममता, अभिषेक भरेंगे हुंकार
टीएमसी के एक सीनियर नेता ने कहा है कि एसआईआर के खिलाफ लोगों को लामबंद करने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी जिलों में भी जाएंगे। ममता बनर्जी मतुआ समुदाय की आबादी वाले बनगांव में मंगलवार को रैली को संबोधित करेंगी। अभिषेक बनर्जी सोमवार को एसआईआर को लेकर 10 हजार से ज्यादा पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को वर्चुअली संबोधित करेंगे।
मतुआ समुदाय का एक वर्ग पहले ही एसआईआर का विरोध कर चुका है। अखिल भारतीय मतुआ महासंघ की अध्यक्ष और टीएमसी की राज्यसभा सांसद ममताबाला ठाकुर इसके विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन पर भी बैठी थीं। टीएमसी ने बूथ स्तर पर एसआईआर हेल्प डेस्क भी बनाई है।
बीएलओ की मौत का मुद्दा उठाया
टीएमसी ने एसआईआर के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया हुआ है और पार्टी लगातार बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौत का मुद्दा उठा रही है।
टीएमसी का कहना है कि एसआईआर के काम के दबाव के चलते ही लगातार बीएलओ की मौत हो रही है। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर एसआईआर को तुरंत रोकने की मांग की है। पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी के बाद नादिया जिले में भी एक बीएलओ ने आत्महत्या कर ली।
