शीना बोरा हत्याकांड में कलीना की फारेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफएसएल) के अधिकारियों को अहम फारेंसिक सबूत वाले एक पैकेट की तलाश है। इस पैकेट में तीन चीजों के अंश हैं-एक गुलाबी कपड़ा, एक टूटा दांत और दाएं कंधे की एक हड्डी। गुरुवार रात तक यह पैकेट नहीं मिल पाया था। 2012 में रायगढ़ में पुलिस से यह पैकेट मिला था। इस पैकेट में फारेंसिक अंश हैं जिनसे इस हत्याकांड के सिलसिले में अहम ‘डीएनए साक्ष्य’ प्राप्त किए जा सकते हैं। ऐसा पुलिस का मानना है।
सूत्रों ने बताया कि 2012 में हुए इस हत्याकांड की जांच दोबारा शुरू होने के बाद रायगढ़ पुलिस ने एफएसएल को एक आउटवार्ड फॉर्म (बाह्य प्रपत्र) संख्या-1476/ 2012 भेजा था। उसके बाद मुंबई पुलिस, रायगढ़ पुलिस और एसएफएल के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई क्योंकि यह पैकेट और इसमें रखी सामग्री लापता थी। ‘आउटवार्ड फॉर्म’ वह होता है जिसमें पुलिस थाने की ओर से एसएफएल को भेजे सबूत होते हैं। एक पुलिस अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि एफएसएल को ये नमूने दिए गए थे।
रायगढ़ के एक पुलिस अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि ‘आउटवार्ड फार्म’ के साथ एक पत्र एसएफल को भेजा गया था। डीएनए जांच की स्थिति और 2012 में अपराधस्थल से बरामद अंशों की मौजूदगी की पुष्टि के लिए यह पत्र भेजा गया था। 22 अगस्त को पुलिस जब इंद्राणी मुखर्जी के ड्राइवर श्याम राय को रायगढ़ के एक गांव में ले गई तो कई राज सामने आए।
दूसरी ओर शीना हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण सबूत पुलिस को मिला है। शीना की हत्या के महीने भर बाद पुलिस को 23 मई, 2012 को गागोदे गांव के जंगल में शीना का अधजला शव मिला था। पहचान नहीं हो पाने के कारण पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। मगर जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सुरेश मिरगे ने शीना का डीएनए जांच के लिए भिजवाया था। पुलिस ने गुरुवार को गागोदे के जंगल से वह बैग भी बरामद कर लिया है जिसमें शीना की लाश रखी गई थी।

