महाराष्ट्र में मचे सियासी संग्राम के बाद आखिरकार राज्य को नई सरकार मिल गई है। शिवसेना ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर सरकार बना ली है। सरकार के मुखिया शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बने हैं। प्रदेश में बनी ठाकरे सरकार बनाने का असली क्रेडिट एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को जाता है। वह किंगमेकर की भूमिका में रहे। शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद कयास लगाए जाने लगे कि प्रदेश में एनसीपी से भाजपा को समर्थन मिल जाएगा। हालांकि, अब सूत्रों के मुताबिक शरद पवार ने पीएम मोदी और अमित शाह के सामने समर्थन के बदले दो बड़ी शर्तें रखी थीं। शरद पवार अपनी बेटी के लिए ताज तो फडनवीस के लिए वनवास चाहते थे।
सूत्रों की मानें तो एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने के लिए तैयार थे। हालांकि, इसके लिए उन्होंने दो बड़ी शर्तें रखी थीं। पहली शर्त में वह अपनी बेटी सुप्रिया सुले को सरकार के अहम कृषि मंत्रालय की कमान दिलाना चाहते थे तो वहीं दूसरी शर्त में देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं देखना चाहते थे। हालांकि इस पर पीएम मोदी और अमित शाह से सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
पार्टी सूत्रों की मानें तो शरद पवार की शर्त सुन आगे आने वाली स्थितियों को भांप लिया गया। आशंका जताई जाने लगी कि महाराष्ट्र को लेकर आई यह शर्त बिहार सरकार में सहयोगी जेडीयू को सिर उठाने पर मजबूर कर सकती है। जेडीयू फिर से रेल मंत्रालय की मांग कर सकता है। जिसे लेकर बीजेपी किसी स्थिति में तैयार नहीं होगी। 2014 के बाद 2019 में भी ऐतिहासिक बहुमत से आई भाजपा सरकार दो बड़े और अहम मंत्रालय अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती।
वहीं, शरद पवार की देवेंद्र फडणवीस को लेकर रखी गई दूसरी शर्त को लेकर सूत्रों ने बताया कि, बीजेपी फडणवीस की जगह महाराष्ट्र में किसी दूसरे चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार नहीं थी। पार्टी आलाकमान की तरफ से सबसे बड़ा तर्क फडणवीस का बेदाग छवि होना था। चुनाव से पहले ही उन्हें सीएम कैंडीडेट घोषित कर दिया गया था। खुद पीएम मोदी ने 24 अक्टूबर आए चुनावी नतीजों के बाद फडणवीस के नेतृत्व में सरकार बनाने को कहा था। इस स्थिति के बाद शरद पवार की दूसरी शर्त भी मामना असंभव था। बताया जा रहा है कि, शरद पवार ने मोदी और शाह को इन दोनों शर्तों पर विचार करने के लिए समय भी दिया था।
महाराष्ट्र में समर्थन के बदले दो अहम शर्तें रखने के बाद 20 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शरद पवार की मुलाकात हुई थी। दोनों के बीच यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली थी। हालांकि, मुलाकात के दौरान भी शरद पवार को सकारात्मक रुख नहीं मिला।
