Shahi Idgah Rani Laxmibai Statue Controversy: दिल्ली के सदर बाजार इलाके में शाही ईदगाह के पास रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति लगाए जाने का विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि, टेंशन को देखते हुए फिलहाल दिल्ली नगर निगम ने डीडीए पार्क में अपना काम रोक दिया है। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

दिल्ली में शाही ईदगाह की जमीन पर कब्जे को लेकर फैलाई जा रही अफवाह के बाद गुरुवार को ईदगाह के पास लोगों की भीड़ जमा होने लग गई थी। हालांकि, पुलिस ने समय रहते ही हालात पर काबू पा लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब पुलिस उन लोगों की तलाश में जुटी हुई है जिन लोगों ने वॉट्सऐप ग्रुप्स में मैसेज करके लोगों की भीड़ को ईदगाह के पास इकट्ठा होने के लिए उकसाया था। वहीं इस मामले पर सियासत भी तेज हो गई है।

मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल

इस मामले ने राजीतिक तूल तब पकड़ लिया जब आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को टारगेट करते हुए कहा कि देशभक्त रानी लक्ष्मीबाई का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मूर्ति को आरएसएस के ऑफिस से सिर्फ 200 मीटर दूर होने की वजह से हटाया जा रहा है। वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखा सवाल करते हुए कहा कि अगर रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति नहीं लगेगी तो क्या वहां पर औरंगजेब की मूर्ति लगेगी।

शाही ईदगाह में क्यों जुटी भीड़? अफवाह के चलते दिल्ली पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

क्या है पूरा मामला

अब पूरे मामले की बात करें तो झंडेवालान चौक पर अभी रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति लगी हुई है। झंडेवालान से पहाड़गंज तक ट्रैफिक रेड लाइट फ्री होनी है। इस कारण मूर्ति को झंडेवालान चौक से मोतिया खान शिफ्ट करना है। डीडीए ने मूर्ति को लगाने के लिए शाही ईदगाह के पास अपनी जमीन दे दी। इस पर शाही ईदगाह कमेटी ने दावा किया है कि वह वक्फ बोर्ड की जमीन है।

शाही ईदगाह कमेटी इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट भी चली गई थी। हालांकि, कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि रानी लक्ष्मीबाई एक राष्ट्रीय नायिका हैं और इस मामले को धार्मिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। इतना ही नहीं कोर्ट की फटकार के बाद में कमेटी ने बिना शर्त माफी मांगते हुए अपनी याचिका को वापस ले लिया। संबंधित खबर के लिए यहां क्लिक करें…