टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के 9 छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा की पुण्यतिथि मनाने के लिए ये सभी इकट्ठा हुए थे, जिसके बाद ट्रॉम्बे पुलिस ने इनके खिलाफ मामला दर्ज किया। हालांकि सेशन कोर्ट से सभी छात्रों को गिरफ्तारी से राहत मिली है लेकिन जस्टिस ने इन्हें फटकार भी लगाई। जस्टिस ने छात्रों की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फटकार लगाई और चेतावनी दी कि उनके खिलाफ यह मामला उनके भविष्य के रोजगार की संभावनाओं पर बुरा असर डाल सकता है।

ट्रॉम्बे पुलिस ने दर्ज किया है FIR

9 छात्रों के नाम ट्रॉम्बे पुलिस द्वारा दर्ज FIR में हैं और उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई सेशन कोर्ट में लंबित है। सोमवार को अतिरिक्त सेशन जस्टिस मनोज बी ओझा ने उन छात्रों को चेतावनी दी, जो कोर्टरूम के पीछे एक लाइन में खड़े थे। जस्टिस ने कहा, “आप में से कितने लोग महाराष्ट्र के बाहर के हैं? आप सब इसी के लिए महाराष्ट्र में पढ़ने आए थे। आपके पिता को इस मामले के बारे में पता है। आप में से कितने लोगों के पिता सरकारी नौकरी में हैं? इस मामले की वजह से आपको सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।”

जस्टिस ने आगे कहा कि अगर वे प्राइवेट नौकरी भी करते हैं, तो भी उन्हें अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामले का खुलासा करना होगा। FIR 12 अक्टूबर, 2025 को देवनार में TISS कैंपस में साईबाबा की पहली पुण्यतिथि मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम से संबंधित है। 57 वर्षीय साईबाबा को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 5 मार्च, 2024 को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत उन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी अमान्य थी। हाई कोर्ट ने 2017 के सेशन कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें साईबाबा को प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के सक्रिय सदस्य होने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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‘आपका करियर बर्बाद हो गया’

छात्रों से जस्टिस ने कहा, “अब आपका आपराधिक रिकॉर्ड है, आपका रिकॉर्ड सिर्फ यहीं नहीं, बल्कि पूरे देश में पुलिस के पास है। आप जानते हैं कि आपने अपने करियर शुरू होने से पहले ही इतनी बड़ी गलती कर दी है, आपका करियर बर्बाद हो गया है।” फिर उन्होंने छात्रों के वकील से पूछा कि छात्र कौन सा प्रोग्राम कर रहे हैं। जब उन्हें बताया गया कि वे सोशल वर्क में मास्टर डिग्री कर रहे हैं, तो जस्टिस ने कहा कि उनकी डिग्री उन्हें नौकरी दिलाने में मदद नहीं करेगी। जस्टिस ने कहा, “आपको लगता है कि आप वैज्ञानिक या इंजीनियर हैं, इंजीनियरों को भी नौकरी नहीं मिलती।”

23 दिसंबर को पिछली सुनवाई के दौरान विशेष सरकारी वकील ने बताया था कि छात्र कोर्ट में मौजूद नहीं थे। उनके वकील ने तब कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वे सोमवार को मौजूद रहेंगे। छात्रों को संबोधित करने के बाद जज ने उन्हें कोर्टरूम से बाहर जाने को कहा और उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं पर बहस के लिए सुनवाई इस महीने के आखिर तक के लिए टाल दी. साथ ही पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को भी बढ़ा दिया।

अग्रिम जमानत याचिकाएं अक्टूबर 2025 में दायर की गई थीं, जब ट्रॉम्बे पुलिस ने संस्थान के एक एसोसिएट डीन की शिकायत पर FIR दर्ज की थी। जांच के लिए छात्रों के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (जिनमें उनके मोबाइल फोन और लैपटॉप शामिल थे) जब्त कर लिए गए थे।