अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राम मंदिर के मुद्दे को धार देने के लिए जल्दी ही तीन बड़ी रैलियां करने वाला है। इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत करते हुए आरएसएस से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि यह तीनों रैलियां इस रविवार को नागपुर, अयोध्या और बेंगलुरु में आय़ोजित की जाएंगी। आरएसएस और वीएचपी ने राम मंदिर के मुद्दे ध्यान में रखते हुए लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए बड़ी योजना बनाई है। इस योजना के तहत 25 नवंबर से लेकर 25 दिसंबर के बीच विभिन्न जगहों पर अलग-अलग 543 रैलियां की जाएंगी।
इसके तहत 9 दिसंबर को नई दिल्ली में साधुओं का मार्च भी होगा। इस मार्च के तीन बाद ही संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू होने वाला है। संघ परिवार की कोशिश है कि वो साधुओं के मार्च और रैलियों का रेला लगा कर संसद के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर सत्र के शुरुआत से ही दबाव बनाने में कामयाब हो सके।
विश्व हिंदू परिषद् के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि राजनीतिक पार्टियों के बीच भी अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर गंभीरता दिख रही है। उन्होंने कांग्रेस नेता सीपी जोशी के उस बयान का जिक्र किया जिसमें सीपी जोशी ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस का पीएम ही राम मंदिर बनवाएगा। इस बयान का जिक्र करते हुए आलोक कुमार ने कहा है कि इससे भी यह साबित होता है कि पार्टी देश की भावनाओं को ध्यान में रखकर विचार कर रही है। यह बहुत ही अच्छा समय है कि वो यह दिखाएं कि वो हिंदूओं की भावनाओं का ख्याल रखते हैं।
उन्होंने कहा कि रैली के लिए नागपुर और बेंगलुरू को चुनने का मकसद यह है कि इन शहरों में रैलियों के जरिए सेंट्रल और साउथ इंडिया के लोगों को इससे जोड़ा जा सके। वीएचपी को उम्मीद है कि रविवार को होन वाली रैली में 2 लाख से ज्यादा लोग जुटेंगे। हालांकि इधर यूपी सरकार ने शिवसेना को राम जन्मभूमि के आसपास किसी भी तरह की रैली की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। शिवसेना नेताओं ने अयोध्या के किला पार्क में पहले ही भूमि पूजन किया था।
इधर खबर यह भी है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शनिवार को अयोध्या पहुंचेंगे। यहां वो साधुओं से मिलेंगे और सरयू नदी पर आरती भी करेंगे। वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि संघ परिवार ने शिवसेना की इन तमाम कोशिशों का स्वागत किया है। उन्होंन कहा कि हालांकि उनका कार्यक्रम शिवेसना से अलग है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि शिवसेना भी राम मंदिर के मुद्दे को राजनीति से दूर रखेगी।
