सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार (24 अगस्त) को निजता के अधिकार पर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दिया है। 9 जजों की बेंच से सर्वसम्मति से ये फैसला दिया है। इस फैसले के बाद देश के किसी भी नागरिक की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी। यह फैसला लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की कई लोगों ने तारीफ की है। इसी बीच अरिंवद केजरीवाल को ट्रोल्स का सामना करना पड़ गया है। केजरीवाल ने भी ट्विटर पर इस फैसले की तारीफ की थी। उन्होंने लिखा था, “Thank u SC for this v important judgement” इस फैसले के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया।
बस इस पर ही ट्विटर यूजर्स उन पर बरस पड़े। ट्विटर यूजर्स ने एक बार में तीन तलाक देने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 6 महीने के लिए लगाए गए बैन पर चुप्पी साधने को लेकर केजरीवाल को लताड़ा। हालांकि तीन तलाक बैन का पार्टी द्वारा स्वागत किए जाने वाले आशुतोष के ट्वीट को केजरीवाल ने रीट्वीट किया था, लेकिन यूजर्स ने उनके(केजरीवाल) कुछ नहीं लिखने पर सवाल खड़े किए। लोगों ने कहा कि उन्हें तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत जोर-शोर से करना चाहिए था। वहीं कुछ ट्विटर यूजर्स ने उन्हें ट्रोल किया। एक ने लिखा, “Judgement Triple Talaq ka b tha, us par muh me dahi kyu jama li thi” एक अन्य ट्विटर यूजर वर्षा राजपूत ने लिखा, “दिल्ली पर पत्थर रख कर कजरूद्दीन ने ट्वीट कर ही दी” ऐसे ही कई लोगों ने केजरीवाल को ट्रोल किया।
Thank u SC for this v important judgement
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 24, 2017
लोगों ने किया ट्रोल

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक अहम फैसले में कहा है कि ‘निजता’ की सीमा तय करना संभव है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केन्द्र सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला आधार योजना के खिलाफ दायर याचिका पर दिया है। निजता के अधिकार का मामला सामने तब आया जब कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकार ने आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया था। याचिका में आधार योजना की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इस फैसले का सोशल नेटवर्क व्हाट्सएप की नई निजता नीति पर भी असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आधार, पैन, क्रेडिट कार्ड में दी गई जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा। बता दें कि संविधान ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं माना है।

