केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ राजधानी दिल्ली से सटे सिंघु बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन पिछले दो हफ्तों से जारी है। इसे लेकर रोजाना टीवी न्यूज़ चैनलों में डिबेट हो रही है। रिपब्लिक टीवी ने शो ‘पूछता है भारत’ में इसी मुद्दे को लेकर चर्चा हो रही थी। इस दौरान जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रवक्ता किसान नेता बलदेव सिरसा पर भड़क गए।
सिरसा ने कहा कि सरकार कहती है यह कानून किसानों के हक़ में है इससे किसानों को फायदा होगा। सरकार कहती है हम किसानों का भला करना चाहते हैं। हमने कहा हमें नहीं चाहिए भला। 3 दिसंबर की मीटिंग में सरकार ने माना था कि यह कानून सही नहीं है और संशोधन करने की बात कही थी। किसान नेता ने कहा “मैं कहना चाहता हूं कि जब कानून किसानों के हित में नहीं है तो संशोधन क्यों करना है इसे हटाया जाये।”
इसपर जदयु प्रवक्ता ने कहा ” सबसे पहली बात आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि यह कानून आएगा कि नहीं आएगा। अगर आप को ही तय करना था तो देश में कानून आने से पहले 6 राज्यों ने इसे लागू कर दिया था तब क्यों कुछ नहीं बोले। क्या ये सही नहीं है कि आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अकाली दल और कांग्रेस पार्टी ने इसका मुद्दा बनाया है। आपके अपने राज्य के किसानों की सब्जियां खराब हो रही है, उनको आप मंडी तक नहीं जाने देते।”
इन कानून के खिलाफ किसान जहां पिछले कई दिनों से अपनी मांगो को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि वो किसी भी कीमत पर इन कानूनों को वापस नहीं लेगी। हालांकि, दिल्ली बॉर्डर पर पिछले 20 दिनों से डेरा डाले किसानों और सरकार की इस जंग में आज का दिन काफी अहम साबित हो सकता है। दरअसल, दिल्ली की सीमाओं पर किसान डटे रहेंगे या उन्हें कहीं और भेजा जाएगा, इसपर आज देश की सबसे बड़ी अदालत अपना फैसला सुना सकती है।
किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. आज SC में मामले की सुनवाई होगी. चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच मामले की सुनवाई करेगी।
