प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को भारत की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे। पिछले 10 सालों में शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यह भारत की 5वीं यात्रा है और UAE के राष्ट्रपति के तौर पर यह उनकी तीसरी आधिकारिक यात्रा है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को लेकर समीक्षा की। दोनों राष्ट्राध्यक्ष इस बात पर सहमत हुए कि पिछले एक दशक में भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों नेताओं ने पिछले दो सालों में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और दुबई के क्राउन प्रिंस उप प्रधान मंत्री और UAE के रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की भारत यात्राओं का स्वागत किया और कहा कि इन यात्राओं से द्विपक्षीय संबंधों में पीढ़ीगत निरंतरता बनी रही है।

छोटी पर बहुत महत्वपूर्ण यात्रा- विदेश सचिव

शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यात्रा पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, “UAE के राष्ट्रपति ने अभी-अभी नई दिल्ली की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी की है। यह एक छोटी, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण यात्रा थी। एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनका स्वागत किया, जो एक खास इशारा है और दोनों नेताओं के बीच बहुत गर्मजोशी भरे और करीबी रिश्तों को दिखाता है। इसके बाद वे एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक साथ गए, जहां सीमित और फिर बड़े फॉर्मेट में बातचीत हुई, जिसमें प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने एक-दूसरे से बात की। नेताओं की मौजूदगी में कई डॉक्यूमेंट्स का भी आदान-प्रदान हुआ। इस यात्रा का महत्व UAE के राष्ट्रपति के साथ आए प्रतिनिधिमंडल की बनावट से समझा जा सकता है। इसमें अबू धाबी और दुबई दोनों के शाही परिवारों के सदस्य, और कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल थे।”

व्यापार को किया जाएगा दोगुना

आगे विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, “व्यापार के मोर्चे पर, 2022 में दोनों देशों के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर साइन होने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। इसे देखते हुए दोनों नेताओं ने लक्ष्य को बढ़ाने और 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 अरब अमेरिकी डॉलर करने का फैसला किया। यह भी तय किया गया कि MSME उद्योगों के निर्यात को पश्चिम एशियाई, अफ्रीकी और यूरेशियाई क्षेत्रों में आसान बनाया जाएगा।”

अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग

साथ ही दोनों देश अंतरिक्ष और व्यावसायीकरण के लिए संयुक्त बुनियादी ढांचे के विकास में अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे, जिसमें प्रक्षेपण परिसर, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षेत्र, अंतरिक्ष स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन सेंटर और एक्सेलेरेटर, प्रशिक्षण संस्थान और विनिमय कार्यक्रम शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त दोनों देश इस पर भी राजी हुए हैं कि दोनों रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढांचागत समझौते की स्थापना के लिए मिलकर काम करें और रक्षा औद्योगिक सहयोग, रक्षा नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, शिक्षा और सिद्धांत, विशेष अभियान और अंतरसंचालनीयता, साइबर स्पेस, आतंकवाद विरोधी सहित कई क्षेत्रों में रक्षा सहयोग का विस्तार करें। आगे पढ़िए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति का एयरपोर्ट पर किया स्वागत, सिर्फ दो घंटे के लिए क्यों पहुंचे हैं भारत?