अयोध्या में मंदिर निर्माण (Ram Mandir Construction) का रास्ता अभी भी पूरी तरह साफ नहीं लग रहा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक रविवार (17 नवंबर) को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस मसले पर एक बैठक बुलाई है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya Land Dispute) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Ayodhya Verdict) के खिलाफ पुनर्विचार याचिका लगाने पर मंथन करेगा।
मुस्लिम समुदाय के लोग करेंगे अंतिम फैसलाः पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक से बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने भी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों से मुलाकात की थी। ये सभी अयोध्या जमीन विवाद से जुड़े हुए थे। शनिवार (16 नवंबर) को हुई इस बैठक में लोगों से रिव्यू पीटिशन को लेकर राय मांगी गई। इंडिया टुडे से बातचीत में जफरयाब जिलानी ने कहा, ‘रविवार को पर्सनल लॉ बोर्ड के सभी सदस्यों की लखनऊ के नदवा कॉलेज में बैठक रखी गई है, वहीं रिव्यू पीटिशन को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।’
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वैकल्पिक जमीन पर भी होगा फैसलाः जफरयाब जिलानी ने कहा, ‘हम यह भी तय करेंगे की अयोध्या में मुस्लिम समुदाय को मस्जिद के लिए दी जा रही पांच एकड़ जमीन स्वीकार करनी चाहिए या नहीं। यदि पुनर्विचार याचिका पर सहमति बनती है तो उसके अनुसार कदम उठाया जाएगा। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला संतोषजनक नहीं था और इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका लगाई जानी चाहिए।’
ओवैसी के बयान का समर्थनः उन्होंने कहा, ‘मैंने फैसला पढ़ा है। मेरा मानना है कि पुनर्विचार याचिका जरूर लगनी चाहिए और अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए के लिए कोई वैकल्पिक जमीन नहीं ली जानी चाहिए। यदि पांच सौ एकड़ जमीन मिले तो भी नहीं लेनी चाहिए। बहरहाल अंतिम फैसला बैठक में लिया जाएगा।’ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील ने हैदराबाद सांसद और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के बयान का भी समर्थन किया। अयोध्या पर फैसले का स्वागत करने वाले जफार फारूकी भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे।
