वायु प्रदूषण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जो वायु गुणवत्ता को लेकर दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। यह समिति हालात से निपटने के उपाय भी सुझाएगी। दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ के बीच रहने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर भारत में प्रदूषण की स्थिति पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को बैठक बुलाई, जिसमें समिति गठित की गई। पांच सदस्यीय इस समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार करेंगे। इसके अन्य सदस्य हैं- प्रधानमंत्री के प्रमुख विज्ञान सलाहकार के विजय राघवन, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के तरुण खन्ना, राज्यसभा के सांसद राजीव चंद्रशेखर और मेजर जनरल माधुरी कानितकर। यह समिति वायु प्रदूषण के विभिन्न स्तरों, उनके वैज्ञानिक पहलुओं और कारणों की छानबीन करेगी और निदान सुझाएगी।
इस बैठक को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उत्तरी भारत के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण के कारण उत्पन्न स्थिति पर चर्चा हुई।’ प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार मोदी ने पश्चिम भारत के हिस्सों में चक्रवातीय दशाओं से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा भी की। यह बैठक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा द्वारा दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों के साथ रविवार और सोमवार को की गई एक के बाद एक समीक्षा बैठकों के बाद हुई है।
दिल्ली और इससे लगे इलाकों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर मंगलवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए खुद से एक नया मामला दर्ज किया, जिस पर बुधवार को सुनवाई होगी। इसके अलावा अदालत ने दिल्ली के मुख्य सचिव विजय कुमार देव को तलब किया है और कहा कि इस क्षेत्र में प्रदूषण के खतरनाक स्तर के कारण जीवन अवधि घटने की ओर इशारा करने वाले वैज्ञानिक आंकड़ों की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन नहीं हो सकता।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता का विशेष पीठ, स्वत: संज्ञान वाले इस मामले की सुनवाई प्रदूषण पर लंबित अन्य विषयों के साथ करेगा। इस मामले का शीर्षक ‘दिल्ली और इससे लगे इलाकों में वायु प्रदूषण का सतर्क करने वाला स्तर’ रखा गया है। शीर्ष न्यायालय ने प्रदूषण से जुड़े एक अलग विषय में सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को ‘भयावह’ करार दिया था। साथ ही, क्षेत्र में निर्माण व तोड़ फोड़ की सभी गतिविधियों व कूड़ा-करकट जलाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया।
अदालत ने प्रदूषण पर चिंता जताते हुए दिल्ली के मुख्य सचिव विजय कुमार देव को तलब किया और कहा कि इस क्षेत्र में प्रदूषण के खतरनाक स्तर के कारण जीवन अवधि घटने की ओर इशारा करने वाले वैज्ञानिक आंकड़ों की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस अवधि में हर साल प्रदूषण की वजह से एक विचित्र स्थिति उत्पन्न होती है लेकिन दिल्ली सरकार, स्थानीय निकाय और अन्य संबंधित राज्य सरकारें अपने कर्तव्यों का ठीक से निर्वहन नहीं करती हैं। अदालत ने इस मामले में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को छह नवंबर को पेश होने का निर्देश दिया है।
पीठ ने इस स्थिति को हतप्रभ करने वाला करार देते हुए कहा- बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन नहीं हो सकता। दिल्ली में भी लोगों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा और उन्हें दिल्ली, जो राजधानी है, से बाहर नहीं निकाला जा सकता। अब समय आ गया है जब हमें इस तरह की पैदा हुई स्थिति के लिए जिम्मेदारी तय करनी होगी। संविधान के अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन करके जीने के अधिकार को नष्ट किया जा रहा है।

