केन्द्र सरकार ने बीती 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म करते हुए आर्टिकल 370 के प्रावधान को खत्म कर दिया था। इसके बाद से जम्मू कश्मीर में काफी प्रतिबंध लागू हैं और अभी तक भी ये प्रतिबंध जारी हैं। इन प्रतिबंधों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, लेकिन कश्मीर में जारी प्रतिबंधों को डेढ़ माह बीतने के बाद भी सरकार ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट में कोई जवाब नहीं दिया है।

लाइव लॉ की एक खबर के अनुसार, जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं, लेकिन जम्मू कश्मीर में जारी प्रतिबंध को 58 दिन बीत जाने के बाद भी केन्द्र सरकार द्वारा अभी तक सुप्रीम कोर्ट में इनके जवाब में कोई शपथपत्र नहीं दिया गया है। जम्मू कश्मीर मुद्दे पर अनुराधा भसीन ने 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने राज्य में मीडिया पर लगी पाबंदियों को चुनौती दी गई थी।

गौरतलब है कि यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में 6 बार लिस्टेड हो चुकी है और मंगलवार को भी सुनवाई के लिए लिस्टेड हुई। लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक इसे लेकर कोई शपथपत्र नहीं दिया गया है। सिर्फ जम्मू कश्मीर डिपार्टमेंट ऑफ इन्फोर्मेशन एंड पब्लिक रिलेशंस के सचिव ने इस संबंध में एक रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दिया है, लेकिन इसे शपथपत्र नहीं माना जा सकता।

खबर के अनुसार, अपनी 12 पेज की इस रिपोर्ट में अधिकारी ने जम्मू कश्मीर की स्थिति को न्यायसंगत बताया है। बीती 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार और जम्मू कश्मीर की राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह याचिका के जवाब में अपने शपथपत्र दाखिल करें। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से ऐसा नहीं किया गया है।

अनुराधा भसीन की याचिका के अलावा सीपीआई महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उनकी पार्टी के नेता और जम्मू कश्मीर के विधायक एमवाई तारिगामी को रिहा करने की मांग की थी। सरकार द्वारा अभी तक इस याचिका के संबंध में भी कोई जवाब नहीं दिया गया है।