लाल किले के पास पिछले साल हुए बम धमाके के मामले में चल रही जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इस बात का पता चला है कि धमाके में शामिल डॉक्टर्स ‘घोस्ट’ या फर्जी सिम कार्ड के जरिये पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में थे।
बीते साल 10 नवंबर की शाम को लाल किले के पास एक हुंडई आई20 कार में विस्फोट हुआ था। विस्फोट में 15 लोगों की जान चली गई थी। एनआईए इस मामले की जांच कर रही है।
जांच में पता चला है कि हुंडई आई20 कार को पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन-नबी चला रहा था। डॉ. उमर उन-नबी फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय में डॉक्टर था।
पांच पॉइंट्स में जानिए दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके से जुड़े लेटेस्ट अपडेट
दो से तीन मोबाइल फोन थे आरोपियों के पास
जांच टीम में शामिल अफसरों ने बताया कि ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल और धमाके की जांच में यह सामने आया है कि गिरफ्तार डॉक्टर्स मुजम्मिल गनई, अदील राथर और अन्य ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए रणनीतिक ‘डुअल-फोन’ प्रोटोकॉल के तहत ‘घोस्ट’ सिम कार्ड का इस्तेमाल किया। अफसरों के मुताबिक, डॉ. उमर-उन-नबी सहित हर आरोपी के पास दो से तीन मोबाइल फोन थे।
इनमें से एक मोबाइल फोन आरोपी के नाम पर रजिस्टर होता था, जिसका इस्तेमाल वे अपने व्यक्तिगत कामों के लिए करते थे जबकि दूसरे फोन का उपयोग आतंकी गतिविधियों में करते थे। दूसरे फोन का इस्तेमाल पाकिस्तान में अपने आकाओं (जिन्हें ‘उकासा’, ‘फैजान’ और ‘हाशमी’ कोडनाम से पहचाना जाता था) से व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के जरिये बातचीत करने में करते थे।
अफसरों ने बताया कि दूसरे फोन के लिए जारी किए गए सिम कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर थे, जिनके आधार कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग किया गया था। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक अलग रैकेट का भी पर्दाफाश किया है, जिसमें फर्जी आधार कार्ड का उपयोग करके सिम जारी किए जा रहे थे।
अफसरों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने देखा कि ये सिम कार्ड पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) या पाकिस्तान में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर एक्टिव थे।
दिल्ली में बम विस्फोट को लेकर क्या बोले मुस्लिम संगठन, केंद्र सरकार से क्या मांग की?
जैश-ए-मोहम्मद के लगे थे पोस्टर
‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा 18-19 अक्टूबर, 2025 की रात को होना शुरू हुआ, जब श्रीनगर शहर के ठीक बाहर की दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के पोस्टर दिखायी दिए।
इन पोस्टरों में घाटी में पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमलों की चेतावनी दी गई थी। इसे एक गंभीर मामला मानते हुए, श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जी.वी. संदीप चक्रवर्ती ने मामले की गहन जांच करने के लिए कई टीम गठित कीं।
गिरफ्तार आरोपियों के बयानों को जोड़कर जांच करने पर श्रीनगर पुलिस हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय पहुंची, जहां दो डॉक्टर्स- दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के कोइल निवासी गनई और लखनऊ निवासी शाहीन सईद को गिरफ्तार किया गया।
इनसे भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किए गए, जिनमें 2,900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल हैं।
जली हुई टांग, जूता और… उमर नबी ही i20 चला रहा था, इसके सबूत कैसे मिले?
