जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के बाद सरकार भले ही दावा कर रही हो कि जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य हैं लेकिन वहां से जैसी खबरें सामने आ रही हैं उससे वहां कि स्थिति असामान्य लग रही है। नेटवर्क 18 की खबर के मुताबिक 5 अगस्त को आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म किए जाने के बाद से पिछले दो महीनों में पत्थरबाजी की 306 घटनाएं सामने आईं हैं। सुरक्षाबलों के एक आंतरिक दस्तावेज के मुताबिक लगभग 100 सुक्षाबल पत्थरबाजी की घटनाओं में घायल हुए हैं।
जम्मू कश्मीर प्रशासन का कहना है कि छिटपुट पत्थरबाजी की घटनाओं के अलावा कश्मीर में सबकुछ सामान्य है और घाटी में शांति है। कश्मीर में बुरहान वानी की मौत के बाद हुए प्रदर्शन की तुलना में कश्मीर में अब प्रदर्शन भी कम हुए हैं। हालांकि अधिकारियों ने पहले कहा था कि 2019 के पहले 6 महीनों में पत्थरबाजी की केवल 40 घटनाएं ही सामने आईं।
सरकार ने आर्टिकल 370 हटाने से पहले राज्य में काफी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया था। इसके अलावा सरकार ने प्रदर्शन फोन और इंटरनेट लाइनों पर गंभीर प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके अलावा मुख्यधारा के राजनीतिक वर्ग सहित विभिन्न कारणों से लगभग 4,000 लोगों को हिरासत में लिया था।सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो महीनों में पांच इनकाउंटर में दो सुरक्षाबल शहीद हुए और 9 घायल हुए। विशेष पुलिस बल अधिकारी बिलाल अहमद की बारामुला में 21 अगस्त को मौत हो गई थी।
आंकड़ों के मुताबिक इन एनकाउंटर में 10 आतंकियों को मौत के घाट उतारा गया है। इस दौरान हथियार छीनने की एक और हैंड ग्रेनेड फेंकने की दो घटना सामने आई।सरकार भले ही इस दौरान दावा कर ही हो कि ना ही एक भी गोली चली है ना किसी की मौत हुई है लेकिन रिकॉर्ड में एक अप्राकृतिक मौत का भी जिक्र है। कक्षा 11वीं के एक छात्र असरार अहमद के परिवार वालों का कहना है कि उनके बेटे की मौत पैलेट गन से हुई है। वहीं सेना इस बात से इंकार करती है और सेना का कहना है कि असरार की मौत पत्थरबाजी के दौरान हुई है।

