Odisha News:पिछले साल नवंबर के आखिर में जगतसिंह पुर जिले की पुलिस ने तारिकुंड पंचायत के तहत आने वाले धनीपुर गांव से कई लोगों को हिरासत में लिया था। इन लोगों को पिछले तीन महीने से उनके रिश्तेदार शेख रबानी ढूंढ रहे हैं। हिरासत में लिए गए लोगों में रबानी की बहन मैरून बीबी, उनके पति शेख राजा और उनके 6 साल से कम उम्र के तीन बच्चे, राजा के नौ रिश्तेदार शामिल है।

जानकारी के मुताबिक हिरासत में लिए गए इन 14 लोगों को राज्य और केंद्र सरकारों के निर्देशों के तहत BSF को सौंप दिया गया और बांग्लादेश में धकेल दिया गया है। इस बात की पुष्टि खुद ओडिशा पुलिस ने दी है। इसके साथ ही यह कन्फर्म हो गया है कि शेख रबानी के बड़े परिवार के 14 सदस्यों को बांग्लादेशी होने के शक में नवंबर 2025 में उठाया गया और डिपोर्ट कर दिया गया।

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शेख रबानी के मन में कई सवाल

अपने रिश्तेदारों को लेकर जब शेख रबानी को ये कन्फर्म हो गया कि उनके रिश्तेदारों को डिपोर्ट कर दिया गया। इसके बाद से शेख रबानी के मन में कई सवाल हैं। क्या बांग्लादेश ने उन्हें वापस भेज दिया, और भारत ने उन्हें फिर से डिपोर्ट कर दिया? क्या परिवार के सदस्य बॉर्डर के उस पार अलग हो गए हैं? उनमें से नौ लोग ठीक कहाँ हैं, जिनसे लगभग दो हफ़्ते पहले आखिरी बार संपर्क हुआ था?

50 लोगों को डिपोर्ट करने की बात

ओडिशा के तटीय केंद्रपाड़ा ज़िले के चपाली गांव के शेख रबानी के पास कई सवाल हैं लेकिन राज्य में बांग्लादेशियों के खिलाफ़ चलाए जा रहे अभियान की वजह से उन्हें कुछ ही जवाब मिले हैं, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के विधानसभा में दिए गए बयान के अनुसार, 1 दिसंबर तक 50 कथित अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट किया गया था।

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पुलिस से पूछा तो भगा दिया

शेख रबानी ने कहा कि जब हमें पता चला कि मेरी बहन के पूरे परिवार को हिरासत में लिया गया है तो हम स्थानीय (जगतसिंहपुर) पुलिस स्टेशन गए। हमें बताया गया कि उन्हें बिना दस्तावेज़ वाले बांग्लादेशी होने के शक में हिरासत में लिया गया है। 32 साल के शेख रबानी एक राजमिस्त्री हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस अफसर से कम से कम यह बताने का अनुरोध किया कि मैरून और उनके परिवार को कहा रखा गया है। इस पर पुलिस की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया बल्कि उन्हें पुलिस स्टेशन से ही भगा दिया गया।

शेख रबानी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण के बाद एक रिश्तेदार ने उन्हें बताया कि परिवार को ज़बरदस्ती बांग्लादेश भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें मैरून के ससुराल वालों के बारे में भी जानकारी मिली, लेकिन उसके उसके पति और बच्चों के बारे में कोई खबर नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि रोज़ी-रोटी कमाने की रोज़ाना की जद्दोजहद के कारण उनके पास मैरून को खोजने के लिए इधर-उधर भागने का ज़्यादा समय नहीं है।

कई लोगों को दस्तावेज देखकर छोड़ा

शेख रबानी ने कहा कि डिपोर्ट किए गए 14 लोगों के अलावा उनके दो बड़े भाइयों को भी उसी समय केंद्रपाड़ा पुलिस ने हिरासत में लिया था लेकिन पुलिस ने उन्हें “विभिन्न दस्तावेज़” दिखाने के बाद जाने दिया, जिससे साबित हुआ कि वे भारतीय हैं। रबानी ने दूसरे लोगों को दस्तावेजों को लेकर कहा कि दूसरों के दस्तावेज़ काफ़ी क्यों नहीं थे, तो उन्होंने कहा कि उनके स्वर्गीय पिता का जन्म भारत में हुआ था। जब तक रबानी को याद है, वह केंद्रपाड़ा में रहे हैं, और कहते हैं कि उन्होंने और उनके सात भाई-बहनों ने यहीं पढ़ाई की है।

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मैरून के ससुराल वाले भी कहते हैं कि परिवार लंबे समय से जगतसिंहपुर में रह रहा है। 68 साल की रहीमा बीबी कहती हैं कि उनके तीन भाई दशकों पहले बंगाल के दक्षिण 24 परगना के पतिबूनिया गांव से जगतसिंहपुर चले गए थे। इनमें मुरानी के ससुर जब्बार भी शामिल हैं। वे फेरीवाले, विक्रेता और राजमिस्त्री का काम करते थे। बंगाल के पुरबा मेदिनीपुर में रहने वाली रहीमा कहती हैं कि हाल ही में मुझे एक रिश्तेदार का फ़ोन आया कि जब्बार के पूरे परिवार को बांग्लादेश भेज दिया गया है जबकि उनके पास यह दिखाने के लिए दस्तावेज़ हैं कि वे भारतीय हैं।

रहीमा कहती हैं कि उनका भतीजा रूहूलअमीन खान उन्हें वापस लाने के लिए कानूनी रास्ते तलाश रहा है। अब तक ओडिशा में किसी भी परिवार ने किसी भी निर्वासन के खिलाफ़ कोर्ट में केस नहीं किया है। 43 साल के रूहूलअमीन ने बताया कि 14 लोगों में से एक ने बांग्लादेश से रहीमा को फ़ोन किया और बताया कि वे चटगांव में फिर से इकट्ठा हो गए हैं। वह जनवरी के पहले हफ़्ते में हमें मिला आखिरी फ़ोन था। उसके बाद से हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है।

रूहूलअमीन आगे कहते हैं कि ओडिशा पुलिस ने 14 लोगों को BSF को सौंप दिया, जिसने उन्हें नादिया के पास से बांग्लादेश भेज दिया। उनके अनुसार बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने उन्हें यह कहते हुए वापस भेज दिया कि उनके बांग्लादेशी होने का कोई सबूत नहीं है। हालांकि, रूहूलअमीन के अनुसार, BSF ने उन्हें फिर से पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर में हिली सीमा पर देखा, और दो दिन बाद, उन्हें फिर से निर्वासित कर दिया।

BSF ने नहीं दिया कोई जवाब

BSF ने संपर्क करने की बार-बार की गई कोशिशों का कोई जवाब नहीं दिया। ओडिशा पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के दिशानिर्देशों के अनुसार काम किया, जिसके तहत बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों को उचित सत्यापन के बाद एक शेल्टर होम में भेजा जाना चाहिए। “एक बार सौंप दिए जाने के बाद राज्य पुलिस की कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती है। BSF आगे की प्रक्रियाओं का ध्यान रखती है।

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बता दें कि 16 नवंबर 2025 को जगतसिंहपुर पुलिस ने धनीपुर में एक संगठित रैकेट के बारे में जानकारी मिलने के बाद छापेमारी की, जो बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों को पनाह देता था और उन्हें गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल करता था। पुलिस ने बताया कि छापेमारी में उन्होंने पांच तलवारें, एक देसी पिस्तौल और सात धारदार हथियार ज़ब्त किए। रैकेट के कथित मास्टरमाइंड सिकंदर आलम उर्फ ​​सेको और उसके भाई अब्दुल मोतलिफ खान को 22 नवंबर को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी के तुरंत बाद आलम के मालिकाना हक वाली 10 कमरों की एक इमारत और तारिकुंड में सात अन्य फूस की संरचनाओं को गिरा दिया गया, जिनके बारे में सरकार ने कहा कि वे उसकी ज़मीन पर बनी थीं और “अवैध प्रवासियों द्वारा कब्ज़ा कर ली गई थीं। आलम के परिवार के अन्य सदस्य आसपास नहीं हैं, और पड़ोसी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

पुलिस कर रही लोगों के वेरिफिकेशन

तारिकुंड के एक निवासी ने बताया कि यहां ज़्यादातर घरों के लोगों को पुलिस ने वेरिफिकेशन के लिए बुलाया और एक हफ़्ते के लिए हिरासत में रखा। जिन्होंने डॉक्यूमेंट्स दिखाए, उन्हें जाने दिया गया, जबकि दूसरों को डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। जगतसिंहपुर के SP अंकित वर्मा ने कहा कि कोई भी डिपोर्टेशन पूरी तरह से वेरिफिकेशन के बाद और देश के कानून के अनुसार ही किया जाता है… हमारे पास उन लोगों के कबूलनामे हैं, जिन्होंने वेरिफिकेशन प्रोसेस के दौरान माना कि वे बांग्लादेश से हैं।

अधिकारियों द्वारा दिए गए ब्रेक-अप के अनुसार 1 दिसंबर तक, लगभग 1,760 संदिग्ध लोगों का पुलिस और STF द्वारा वेरिफिकेशन किया गया था, जिनमें से 1,667 को आधार, वोटर ID या राशन कार्ड, या ज़मीन और कॉल रिकॉर्ड जैसे डॉक्यूमेंट्स के आधार पर वेरिफिकेशन के बाद छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि अलग-अलग ज़िलों में 50 लोगों का वेरिफिकेशन पेंडिंग है। राज्य में एक डिटेंशन सेंटर कटक ज़िले के अथगढ़ में है, और ज़िलों में 18 होल्डिंग सेंटर हैं।

अधिकारियों को हिरासत में रखे गए लोगों की सही संख्या के बारे में पक्का पता नहीं है। एक अन्य तटीय ज़िले के SP ने कहा कि किसी भी समय, लगभग 30 लोग होल्डिंग सेंटर में वेरिफिकेशन का इंतज़ार कर रहे हो सकते हैं। बांग्लादेश में हिंदू शिक्षक बीरेंद्र कुमार डे के घर में लगाई आग, दहशत में परिवार