Niira Radia Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की कुछ राजनेताओं, व्यापारियों, मीडियाकर्मियों और अन्य लोगों के साथ इंटरसेप्ट की गई बातचीत की जांच के बाद कोई आपराधिक गतिविधि का पता नहीं लगा है। शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसी की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए मामले पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
सीबीआई ने नीरा राडिया को 8,000 अलग-अलग टेप बातचीत से संबंधित मामले में क्लीन चिट देते हुए कहा है कि उसने इससे जुड़े 14 मामले में शुरुआती जांच की थी, लेकिन कोई मामला नहीं बनने के बाद पूछताछ बंद कर दी गई।
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत से कहा, ‘सीबीआई को रिकॉर्ड की गई बातचीत की जांच करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने ही दिया था। इस मामले में 14 प्रीलिमिनरी इनक्वॉयरी रजिस्टर की गई थी, जिसकी रिपोर्ट कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौंपी जा चुकी है। इनमें जांच एजेंसी को कोई भी ऐसी बात नहीं मिली, जिसे आपराधिक कहा जा सके। इसके अलावा अब फोन-टैपिंग के बारे में गाइडलाइन्स भी लागू हो चुकी हैं।’ भाटी ने यह भी कहा कि प्राइवेसी के मामले में दिए गए अदालत के फैसले के बाद अब इस मामले में कुछ भी नहीं बचा है।
12 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि वह दशहरे की छुट्टी के बाद मामले की सुनवाई करेगी। पीठ ने कहा, ‘इस बीच सीबीआई एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि वो इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को करेगी।
याचिकाकर्ता के वकील ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) द्वारा दायर एक और याचिका है, जिसमें मांग की गई थी कि इन टेपों को जनहित में सार्वजनिक किया जाए। सीपीआईएल की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि राडिया दो सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों के लिए एक कॉर्पोरेट लॉबिस्ट थी और जनता आदि को प्रभावित करने के प्रयास किए गए थे, जो सामने आया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में जांच का दिया था निर्देश
शीर्ष अदालत ने 2013 में कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की टेप की गई बातचीत पैदा हुए छह मुद्दों की सीबीआई जांच का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था, ‘राडिया की बातचीत बाहरी उद्देश्यों के लिए सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से निजी उद्यमों द्वारा गहरे द्वेष को प्रकट करती है।’
शीर्ष अदालत टाटा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें टेप के लीक होने में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि यह उनके जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता का अधिकार शामिल है। उन्होंने तर्क दिया था कि एक कॉरपोरेट लॉबिस्ट के रूप में राडिया का फोन कथित कर चोरी की जांच के लिए टैप किया गया था और टेप का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता है।
राडिया के फोन की निगरानी के हिस्से के रूप में बातचीत को 16 नवंबर, 2007 को वित्त मंत्री को एक शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नौ साल के भीतर राडिया ने 300 करोड़ रुपये का व्यापारिक साम्राज्य बनाया था।
