तमिलनाडु में एक 17 वर्षीय दलित छात्रा एस. अनीता द्वारा आत्महत्या करने से भड़की राजनीतिक पार्टियां और छात्र संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और राज्य सरकार व केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। छात्रा की आत्महत्या ने मेडिकल कॉलेजों में राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) के आधार पर प्रवेश को लेकर मामला गरमा दिया है। राज्य की राजधानी में यहां दलित पार्टी विदुथालाई चिरुथैगल काच्चि (वीसीके) और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने विरोध प्रदर्शन किए। वहीं इस मामले में छात्रा के पिता ने सवाल उठाया है कि आखिर मेरी बेटी का क्या दोष था? आखिर उसने यह कदम क्यों उठाया? इन सारे सवालों का अब जवाब कौन देगा? अनिता के पिता ने कहा, “अनिता ने हर मुश्किलों का सामने करते हुए पढ़ाई की। वह नीट को लेकर चिंतित थी। उसने क्या गलत किया था, इसका जवाब कौन देगा?” बता दें कि अनिता ने शुक्रवार को सुसाइड कर लिया था। अनिता ने कुझुमुर गांव स्थित अपने ही घर में रस्सी से फांसी लगा ली थी। वह बहुत ही गरीब परिवार से थी। उसके पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं।

छात्रा के आत्महत्या करने पर तमिलनाडु में सियासी माहौल काफी गरमा गया है। हर कोई दल अब इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। इस जानकारी के बाद एक सामाजिक संगठन ने ऐलान किया है कि वह यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगा। इसी को लेकर प्रशासन ने यहां कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी है। विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए यहां मरीना बीच पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई।

माकपा द्वारा तिरुनेलवेली जिले में प्रदर्शन किया गया। रपटों के मुताबिक, राज्य में कोयम्बटूर, वेल्लोर, विल्लुपुरम और कई अन्य जगहों पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए। अरियलुर में दुकानें बंद रहीं। एक दैनिक मजदूर की बेटी अनीता अरियलुर जिले की रहने वाली है। उसने 12वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षा में 1,200 में से 1,176 अंक प्राप्त किए थे। अनीता ने मेडिकल कॉलेजों में नीट प्रवेश परीक्षा बंद कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी और उसने कहा था कि इस परीक्षा से मेडिकल सीट पाने की संभावना को लेकर ग्रामीण इलाकों के गरीब छात्र-छात्राओं पर असर पड़ेगा।

अनीता के रिश्तेदारों ने बताया कि वह मेडिकल सीट पाने के लिए नीट में ज्यादा अंक नहीं ला सकती थी और शुक्रवार को उसने आत्महत्या कर ली। अनीता की मौत पर तमिलनाडु की विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के. पलनीस्वामी की सरकार और भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की निंदा की। इसके अलावा यहां कई राजनीतिक दलों और तमिल समर्थक संगठनों ने शनिवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया। उन्होंने तुरंत प्रवेश परीक्षा नीट को वापस लिये जाने की मांग की। माकपा और उसके छात्र एवं युवा संगठन, एसएफआई और डीवाईएफआई ने दलित लड़की की खुदकुशी पर सड़क पर यातायात रोक दिया। पार्टी की राज्य इकाई के सचिव जी रामकृष्णन और कई अन्य को हिरासत में ले लिया गया।

इसी तरह यहां किलपुक में रास्ता रोकने पर वीसीके पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। एक छात्र संगठन ने ओमांतुरर इस्टेट में सरकारी मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की मुख्य सड़क को बंद करने की कोशिश की और उनके सदस्यों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ नारेबाजी की।