रामानुज पाठक

तंत्रिका तंत्र शरीर का ऐसा नियंत्रक स्थल है, जिसके आदेश के बगैर न आप सोच सकते हैं, न महसूस कर सकते हैं, न याद कर सकते हैं और न ही विभिन्न क्रियाओं, जैसे दिल का धड़कना, फेफड़ों और पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली, शरीर के तापमान पर नियंत्रण आदि का संचालन संभव है। मगर इस तंत्र की जानकारी लोगों में कम देखने को मिलती है, साथ ही इसकी सेहत की अनदेखी भी की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार तंत्रिका तंत्र से जुड़ी छह सौ से अधिक समस्याएं हैं, जिनमें अल्जाइमर्स, पार्किंसन्स और डिमेंशिया, ब्रेन स्ट्रोक, माइग्रेन, मिर्गी आदि प्रमुख हैं। ‘दि लैंसेट ग्लोबल हेल्थ’ में हाल में छपा एक अध्ययन देश में तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलाजिकल) की समस्याओं के बढ़ते बोझ की तस्वीर सामने रखता है। मिर्गी यानी एपिलेप्सी एक केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार है, इसमें मस्तिष्क की गतिविधियां असामान्य हो जाती हैं। यह दुनिया की सबसे पुराना पहचाना हुआ रोग है, जिसके लिखित दस्तावेज 4000 ईसा पूर्व के हैं।

दुनिया भर में लगभग पांच करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से ग्रसित हैं, जो विश्व स्तर पर सबसे आम तंत्रिका तंत्र रोगों में से एक है। इस विकार को दवाओं और उपचारों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। एटीईएसटी के आंकड़ों के अनुसार भारत में एक करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से पीड़ित हैं, जिसे ‘अपस्मार’ भी कहा जाता है। हालांकि लगभग 60-70 फीसद मिर्गी को केवल दवाओं से दूर किया जा सकता है।

यह तंत्रिका तंत्र की समस्या है, जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है। हालांकि जब दौरा पड़ता है तो शरीर भी प्रभावित होता है। मिर्गी को मस्तिष्क में बार-बार पड़ने वाले दौरे की प्रवृत्ति के रूप में वर्णित किया गया है। कुछ लोगों को जागते समय दौरे पड़ते हैं, जिन्हें ‘जागृत दौरे’ कहा जाता है। कुछ लोगों को सोते समय दौरे पड़ते हैं, जिन्हें ‘नींद के दौरे’ (या ‘रात के दौरे’) कहा जाता है।

यूनानी दार्शनिक हिप्पोक्रेटस (460-377 ईसा पूर्व) पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने सोचा था कि मिर्गी मस्तिष्क में शुरू होती है। अधिकांश लोगों को ‘सामान्य परिस्थितियों’ में दौरे नहीं पड़ते। दौरे तब पड़ते हैं जब मस्तिष्क के सामान्य रूप से काम करने के तरीके में अचानक रुकावट आ जाती है। दौरे के बीच मस्तिष्क सामान्य रूप से कार्य करता है।

मिर्गी एक परिवर्तनशील स्थिति है, जो अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करती है। चिकित्सक सलाह देते हैं कि मिर्गी से पीड़ित रोगी उचित चिकित्सा देखभाल लें और समाज इस बीमारी के बारे में अपने पुराने और अपमानजनक विचारों को बदले। मिर्गी असाध्य रोग नहीं है, इसका उपचार संभव है।

मिर्गी को लेकर प्राचीन भ्रांतियां आज भी मौजूद हैं। इससे बहुत सारे कलंक जुड़े हुए हैं। ‘एपिलेप्सी सोसाइटी’ के एक अध्ययन से पता चला है कि ब्रिटेन में लगभग दो फीसद लोग अब भी मानते हैं कि मिर्गी बुरी आत्माओं के कारण होती है। पचहत्तर फीसद से अधिक लोग दौरा पड़ने पर कुछ सामान्य प्राथमिक उपचार करने के बजाय एंबुलेंस बुलाते हैं। मिर्गी किसी भी उम्र में शुरू हो सकती है।

कुछ लोगों की मिर्गी दूर हो सकती है और उन्हें दौरे आना बंद हो जाते हैं। यह अलग-अलग कारणों से होती है। कुछ कारण जटिल हो सकते हैं, और उन्हें पहचानना कठिन हो सकता है। शोधकर्ता मानते हैं कि मिर्गी विकसित होने की संभावना हमेशा कुछ हद तक आनुवंशिक होती है। हालांकि, किसी व्यक्ति को मस्तिष्क की चोट या आघात के कारण दौरे पड़ने शुरू हो सकते हैं।

मिर्गी के निदान के लिए कई अलग-अलग परीक्षण किए जा सकते हैं, जैसे ‘इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम’ (ईईजी) या ‘मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग’ (एमआरआइ) स्कैन। मिर्गी का इलाज आमतौर पर जब्ती-रोधी दवा (एएसएम) से किया जाता है। एएसएम का उद्देश्य दौरे पड़ने से रोकना है। सही एएसएम के साथ, मिर्गी से पीड़ित सत्तर फीसद लोगों के दौरे को नियंत्रित किया जा सकता है।

मिर्गी के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पहला एएसएम 1912 में फेनोबार्बिटोन था। अब यूके (यूनाइटेड किंगडम) में तीस से अधिक एएसएम उपलब्ध हैं। जिन लोगों के दौरे एएसएम से नियंत्रित नहीं होते, उनके लिए सर्जरी एक विकल्प हो सकता है। इसमें उनके मस्तिष्क के उस हिस्से को हटाया जा सकता है, जो दौरे का कारण बनता है।

‘इंटरनेशनल ब्यूरो फार एपिलेप्सी’ (आइबीई) मिर्गी से पीड़ित लोगों और उनकी देखभाल करने वाले लोगों के जीवन की सामाजिक स्थिति और गुणवत्ता में सुधार करता है। आइबीई एक गैर-लाभकारी, कानूनी अंतरराष्ट्रीय संगठन है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलंबिया राज्य में पंजीकृत है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं गैर-सरकारी संगठनों, ‘इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी’ और ‘इंटरनेशनल ब्यूरो फार एपिलेप्सी’ ने संयुक्त रूप से शोध करके एक निष्कर्ष निकाला, जिसे ‘एपिलेप्सी, ए पब्लिक हेल्थ इंप्रेटिव’ में प्रकाशित किया गया।

इस अध्ययन में पाया गया कि कम आय वाले देशों में रहने वाले मिर्गी से ग्रस्त रोगियों को प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाता। जिस कारण लोगों में समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। लोग इसे जीवन पर एक धब्बा भी मानते हैं। ‘इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी’ (आइएलएई) की स्थापना 1909 में हुई थी और यह सौ से अधिक राष्ट्रीय संस्थाओं का संगठन है। इसका उद्देश्य मिर्गी के बारे में लोगों को जागरूक करना, इसके इलाज के लिए अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने 2019 में मिर्गी को लेकर एक सार्वजनिक स्वास्थ्य अनिवार्यता रिपोर्ट जारी की थी। यह मिर्गी पर पहली वैश्विक रिपोर्ट थी, जिसमें मिर्गी के बोझ तथा वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया पर उपलब्ध साक्ष्य का सारांश प्रस्तुत किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ‘मेंटल हेल्थ गैप एक्शन प्रोग्राम’ (एमएचजीएपी) का उद्देश्य विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए मानसिक, स्रायविक और मादक द्रव्यों के सेवन से पैदा होने वाले विकारों के लिए आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को बढ़ाना है।

मिर्गीग्रस्त रोगियों में असमय मृत्यु की दर तीन गुना अधिक होती है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, मिर्गी रोगियों की मृत्यु दर, उच्च आय वाले देशों की तुलना में काफी अधिक है। मिर्गी से पीड़ित लगभग आधे वयस्कों में कम से कम एक अन्य स्वास्थ्य समस्या होती है। इसमें अवसाद और चिंता शामिल हैं। मिर्गी से पीड़ित तेईस फीसद वयस्क अवसाद और बीस फीसद व्यग्रता का अनुभव करते हैं।

इसके दौरे से मानसिक स्वास्थ्य खराब और जीवन की गुणवत्ता कम हो सकती है। मिर्गीग्रस्त तीस से चालीस फीसद बच्चों को विकास और सीखने जैसे कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों को दौरे की आवृत्ति कम करने और जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार के लिए तनाव पर काबू पाना जरूरी है।