मोदी सरनेम मानहानि केस (Defamation Case Against Rahul Gandhi) में आज सूरत की सेशंस कोर्ट राहुल गांधी की अपील पर फैसला सुनाएगी। निचली अदालत ने इस मामले में उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता चली गई थी। उन्हें अपना बंगला भी खाली करना पड़ा। इस मामले को लेकर 3 अप्रैल की राहुल गांधी की ओर से सेशंस कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। इसके बाद 13 अप्रैल को सेशंस कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इसके बाद कोर्ट के फैसले को 20 अप्रैल तक के लिए सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में सूरत की अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है। दोपहर साढ़े 12 बजे तक फैसला सुना सकती है।

बता दें कि राहुल गांधी की अपील को लेकर बीजेपी विधायक एवं शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी ने इसी अदालत में पहले दाखिल किए गए अपने जवाब में राहुल गांधी की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि राहुल गांधी ‘बार-बार अपराध’ करते हैं और उन्हें अपमानजनक बयान देने की आदत है। पूर्णेश मोदी की तरफ से कहा गया था कि राहुल गांधी की तरफ से काफी बचकाने तरीके से कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। वे तीन-तीन मुख्यमंत्रियों के अपील के समय लगाकर दबाव बना रहे हैं।

पिछली सुनवाई पर राहुल गांधी की तरफ दलील दी गई थी कि निचली कोर्ट की सजा काफी ज्यादा है। लोकतंत्र में विपक्ष का सांसद हमेश सुनहरे शब्दों में बात नहीं कर सकता है। ऐसे में उनके बयान को एक सार देखा जाना चाहिए। राहुल गांधी के एडवोकेट ने कोर्ट में फिर से दोहराया था कि मोदी समुदाय जैसी कोई चीज ऑन रिकॉर्ड नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद एडीजे रॉबिन पॉल मोगेराने फैसले को सुरक्षित रख लिया था।

कानून के जानकारों की मानें तो यदि कोर्ट राहुल गांधी के पक्ष में फैसला सुनाती है तो उनकी लोकसभा की सदस्‍यता बहाल हो सकती है। राहुल गांधी की ओर से कन्विक्शन रद्द करने की अपील की गई है। यदि कोर्ट अपील मंजूर करती है तो इससे राहुल गांधी को राहत मिल सकती है। अगर सूरत सेशंस रोक से राहुल गांधी की सजा पर रोक लगती है तो निश्चित तौर पर उनके संसद की सदस्यता बहाल होने का रास्त खुलेगा और वह 2024 में चुनाव भी लड़ पाएंगे। अगर कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो उन्हें फिर अगले दिन में हाईकोर्ट का रुख करना पड़ेगा।

(इनपुट-एजेंसी)