प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान मामलों की सुनवाई करने के निर्णय के लिए न्यायपालिका की सराहना करते हुए कहा कि इससे लोगों में जिम्मेदारी का भाव आएगा। सुप्रीम कोर्ट में समन्वित केस प्रबंधन सूचना प्रणाली पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से प्रौद्योगिकी अपनाने की अपील की ताकि बदलते समय में प्रासंगिक रह सके। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, देश बदल रहा है, आज छुट्टी है। हम लोग काम कर रहे हैं। आज छुट्टी है, बुद्ध पूर्णिमा की। इस कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेएस खेहर समेत शीर्ष अदालत के वरिष्ठ जजों और विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी हिस्सा लिया।  प्रधानमंत्री ने पिछले साल अपनी सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर ‘मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है’ गीत जारी किया था। मोदी ने देश के प्रधान न्यायाधीश की मौजूदगी में सुप्रीम कोर्ट की एकीकृत मुकदमा प्रबंधन प्रणाली की बुधवार को शुरुआत की। इस प्रणाली से वादियों को आंकड़े हासिल करने और आॅनलाइन सूचना हासिल करने में मदद मिलेगी।

साथ ही यह सुप्रीम कोर्ट में कागज रहित काम की दिशा में एक अहम कदम होगा। प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने इस मौके पर कहा कि वे सभी 24 उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में एकीकृत प्रणाली शुरू करने का प्रस्ताव रखते हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। हेरफेर कम होगा और वादी को वास्तविक समय में अपने मुकदमे की प्रगति के बारे में जानने में मदद मिलेगी। केंद्र और राज्य सरकार के प्रत्येक विभाग को यह पता चल जाएगा कि क्या उन्हें मामले में पक्षकार बनाया गया और उन्हें इसी के अनुसार तैयारी करने में मदद मिलेगी। अदालत के शुल्क और प्रक्रिया शुल्क की गणना आॅनलाइन की जाएगी। जिससे वादी को इसमें आने वाली लागत का पता लग जाएगा। न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि इससे बार को मदद मिलेगी और वकीलों का कार्यभार नहीं बढ़ेगा।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वकीलों से आग्रह किया कि वे विधि मंत्रालय की ओर से शुरू की गई योजना का हिस्सा बनें। जिसके तहत गरीबों का केस मुफ्त में लड़ने का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके आग्रह के बाद कई महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ अब हर महीने की नौ तारीख को गरीब वर्ग की गर्भवती महिलाओं को निशुल्क सेवाएं देती हैं। आइटी क्षेत्र के 42 हजार छात्र सरकार की ओर से उठाए गए 400 मुद्दों पर समाधान सुझा रहे हैं।

इस अवसर पर भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वे सभी 24 उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों के साथ प्रणाली को जोड़ने का प्रस्ताव करते हैं। इससे उपयोगकर्ताओं के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मामलों की प्रगति की जानकारी वास्तविक आधार पर प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इस प्रणाली के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों को यह जानकारी मिल सकेगी कि क्या उन्हें किसी मामले में पक्ष बनाया गया है और इसके अनुरूप वे अपनी तैयारी कर सकते हैं।

इस अवसर पर मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों का गर्मी की छुट्टियों में बैठने के निर्णय से गरीबों को न्याय प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि नए हार्डवेयर से जुड़ी प्रौद्योगिकी के प्रति लोगों की सोच अभी भी एक समस्या है। सरकारी कार्यालयों में फूलदान का स्थान कंप्यूटर ने जरूर ले लिया है लेकिन ये अभी भी ‘शो पीस’ के रूप में हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग आज आधुनिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन आज भी एसएमएस भेजने के बाद फोन करके यह पूछना नहीं भूलते कि क्या दूसरे पक्ष को संदेश मिला या नहीं। उन्होंने दावा किया कि पेपरलेस काम की पहल के कारण लाखों लीटर पानी और हजारों की संख्या में पेड़ बचाए जा सकते हैं। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि एक ए फोर आकार का पन्ना बनाने में दस लीटर पानी लगता है। नोटबंदी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि हम डिजिटल लेन-देन की ओर बढ़ें ताकि गरीबों के लिए मकान और नए स्कूल बनाने के लिए पैसा बचाया जा सके।