बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर से विवादों में हैं। एमपी सरकार में शहरी विकास, आवास और संसदीय मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभालने वाले कैलाश विजयवर्गीय पहले भी आपत्तिजनक टिप्पणियों के कारण कई बार मुश्किलों में पड़ चुके हैं। अब वो इंदौर में चल रहे पानी में मिलावट की घटना से जुड़े कमेंट्स को लेकर विवादों में घिर गए हैं। इस घटना में करीब 7 लोगों की मौत हो गई है और 100 से ज़्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

क्या है मामला?

कैलाश विजयवर्गीय ने कैमरे पर एक गलत शब्द का इस्तेमाल किया और इससे राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। एक निजी चैनल के पत्रकार ने उनसे पानी में मिलावट के बारे में सवाल किया। इसपर कैलाश विजयवर्गीय ने अपशब्द का प्रयोग कर दिया। प्रशासन के अनुसार कैलाश विजयवर्गीय के इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की पाइपलाइन के ठीक ऊपर एक शौचालय बनाया गया था। इसमें ज़रूरी सेफ्टी टैंक नहीं था, जिसके कारण सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया।

‘फालतू सवाल मत पूछो’

कैलाश विजयवर्गीय ने रिपोर्टर द्वारा सवाल पूछने पर गुस्सा में कहा, “फालतू सवाल मत पूछो।” जब रिपोर्टर ने जवाब लेना चाहा, तो कैलाश विजयवर्गीय को घंटा शब्द का इस्तेमाल करते हुए सुना जा सकता है। ये आमतौर पर किसी बात को बकवास या बेकार बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद पत्रकार ने मंत्री से अपनी भाषा में मर्यादा बनाए रखने के लिए कहा।

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महिला क्रिकेटरों को लेकर भी दे चुके हैं विवादित बयान

कैलाश विजयवर्गीय इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। अक्टूबर 2025 में कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों के साथ छेड़छाड़ पर टिप्पणी कर दी थी, जिसपर उनकी खूब आलोचना हुई थी। उन्होंने कहा था कि खिलाड़ियों को अपने होटल से बाहर निकलने से पहले अधिकारियों को सूचित करना चाहिए था और इस घटना को अधिकारियों और क्रिकेटरों दोनों के लिए एक सबक बताया था। भारत में क्रिकेटरों की लोकप्रियता पर ज़ोर देते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि खिलाड़ियों को सार्वजनिक रूप से बाहर निकलने से पहले सुरक्षा या स्थानीय प्रशासन को सूचित करना चाहिए।

राहुल गांधी पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

सितंबर 2025 में कैलाश विजयवर्गीय ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि विपक्ष का नेता (स्पष्ट रूप से राहुल गांधी का जिक्र करते हुए) ऐसा व्यक्ति है जिसमें संस्कृति की कमी है क्योंकि वह सार्वजनिक रूप से अपनी बहन को चूमता है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था, “आज हमारे पास विपक्ष का नेता ऐसा है कि वह अपनी छोटी बहन को सबके सामने चूमता है। मैं आपसे पूछना चाहता हूं, क्या आप में से किसी ने अपनी छोटी बेटी या छोटी बहन को सबके सामने चूमा है? यह मूल्यों और संस्कृति की कमी है। ये मूल्य विदेशी संस्कृति के हैं। अगर भारत को चलाना है, तो यह हमारे देश के मूल्यों के आधार पर चलेगा।” इन टिप्पणियों पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और उनसे माफी मांगने की मांग की थी।

आज़ादी को कटी-फटी बता चुके हैं कैलाश

पिछले साल अगस्त में कैलाश विजयवर्गीय ने 15 अगस्त, 1947 को मिली भारत की आज़ादी को कटी-फटी (टुकड़ों में बंटी) आज़ादी बताया था। इंदौर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बोलते हुए, उन्होंने अखंड भारत (अविभाजित भारत) के अपने विज़न के बारे में बात की और दावा किया कि एक दिन ऐसा आएगा जब इस्लामाबाद में तिरंगा फहराया जाएगा, जिससे पूर्ण और एक भारत का सपना पूरा होगा।

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‘शूर्पणखा’ पर भी हुआ था विवाद

अप्रैल 2023 में जब कैलाश विजयवर्गीय बीजेपी के महासचिव थे, तो उन्होंने इंदौर में एक धार्मिक कार्यक्रम में यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया कि खराब या छोटे कपड़े पहनने वाली लड़कियां रामायण के एक किरदार ‘शूर्पणखा’ जैसी दिखती हैं। जून 2025 में उन्होंने फिर से छोटे कपड़े पहनने वाली महिलाओं की आलोचना की। उन्होंने कहा था कि वह महिलाओं को देवी का रूप मानते हैं। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि अगर भारत में कोई लड़की अच्छे और सुंदर कपड़े पहनती है, अच्छा मेकअप करती है और गहनों से खुद को सजाती है, तो उसे बहुत आकर्षक माना जाता है। लेकिन विदेश में, कम कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है। यह उनकी सोच का तरीका है।

बेटे ने बैट से अधिकारी को पीटा था

जून 2019 में कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश, (जो उस समय इंदौर-3 से विधायक थे) को अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान इंदौर नगर निगम के एक अधिकारी को बल्ले से मारने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया था। इस मामले ने बीजेपी को (उस समय मध्य प्रदेश में विपक्ष में थी) बैकफुट पर ला दिया था। तब कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आकाश को दोषी ठहराने का वादा किया था। 2023 के विधानसभा चुनावों में आकाश को इंदौर-3 से टिकट नहीं दिया गया और कैलाश विजयवर्गीय को टिकट मिला। सितंबर 2024 में आकाश को बरी कर दिया गया, जब नगर निकाय अधिकारी ने क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान अदालत को बताया कि वह अपने फोन में व्यस्त था और इसलिए यह नहीं देख पाया कि उसे बल्ले से किसने मारा।