प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने यह रिपोर्ट तैयार करवाई है। ईएसी-पीएम के चेयरमैन विवेक देवराय ने मंगलवार को यह रिपोर्ट सामाजिक प्रगति सूचकांक: देश के राज्य और जिले जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार, आइजोल (मिजोरम), सोलन (हिमाचल प्रदेश) और शिमला (हिमाचल प्रदेश) सामाजिक प्रगति के मामले में तीन सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिले रहे हैं। यह रिपोर्ट प्रतिस्पर्धा संस्थान और गैर-लाभकारी संगठन सोशल प्रोग्रेस इम्पेरेटिव ने तैयार की है। इसके लिए एसपीआइ को आधार बनाया गया है जो देश में राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर देश की सामाजिक प्रगति को मापने का पैमाना है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, दीर्घावधि में सतत आर्थिक वृद्धि के लिए सामाजिक प्रगति जरूरी है। यह सूचकांक आर्थिक वृद्धि और विकास के परंपरागत उपायों का पूरक है। रिपोर्ट के अनुसार, सभी राज्यों में पुदुचेरी का एसपीआइ स्कोर सबसे अधिक 65.99 रहा। लक्षद्वीप और गोवा 65.89 और 65.53 के स्कोर के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड का एसपीआइ स्कोर सबसे कम 43.95 रहा। वहीं बिहार का एसपीआइ स्कोर भी 44.47 के निचले स्तर पर रहा।

इस रिपोर्ट में 36 राज्यों एवं संघ-शासित प्रदेशों और देश के 707 जिलों को सामाजिक प्रगति के विभिन्न मानकों पर उनके प्रदर्शन के आधार पर आंका जाता है। एसपीआइ में सामाजिक प्रगति के तीन क्षेत्रों बुनियादी मानवीय जरूरतों, बेहतर जीवनशैली के आधार और अवसरों के लिहाज से राज्यों के प्रदर्शन को आंका जाता है। मानवीय जरूरतों के मामले में किसी राज्य या जिले में पोषण और स्वास्थ्य देखभाल, जल और स्वच्छता, व्यक्तिगत सुरक्षा और रहने की स्थिति का आकलन किया जाता है।

वहीं रहन-सहन या जीवनस्तर के मामले में मूल ज्ञान, सूचना तक पहुंच, संचार, स्वास्थ्य और देखभाल और पर्यावरण की गुणवत्ता को देखा जाता है। इसके अलावा अवसरों के मामले में व्यक्तिगत अधिकार, निजी आजादी और चयन, समावेशन और आधुनिक शिक्षा तक पहुंच की स्थिति को आंका जाता है। कार्यक्रम में शामिल 112 जिलों में से 27 जिलों ने ही सामाजिक प्रगति सूचकांक में राष्ट्रीय औसत से अधिक अंक हासिल किए हैं। इनमें से भी सिर्फ पांच जिले ही देश के शीर्ष 100 जिलों की रैंकिंग में जगह बना पाए हैं।