कश्मीरी पंडितों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बड़ा बयान दिया है। फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कश्मीर घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडितों से अपने घर लौटने की अपील की। हालांकि फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनमें से ज़्यादातर लोग घाटी में स्थायी रूप से लौटेंगे क्योंकि वे दूसरी जगहों पर बस गए हैं।

कश्मीरी पंडितों की वापसी पर क्या बोले अब्दुल्ला?

कश्मीरी पंडितों की वापसी के बारे में पूछे जाने पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि वे तो मेहमानों की तरह आएंगे। मुझे नहीं लगता कि वे रहने के लिए आएंगे। जम्मू में दो दिन के पार्टी कार्यक्रम के मौके पर उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “सबसे पहले उन्हें (कश्मीरी पंडितों) इस बारे में सोचना होगा क्योंकि वे हर जगह बस गए हैं। उनमें से कई बूढ़े हो गए हैं और इलाज करवा रहे हैं। उनके बच्चे स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं।”

‘होलोकॉस्ट डे’ मना रहे पंडित

इसके बाद फारूक अब्दुल्ला से पत्रकारों ने कहा कि कश्मीरी पंडित 19 जनवरी को ‘होलोकॉस्ट डे’ के रूप में मना रहे हैं और अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें सरकार से घाटी में उनकी सम्मानजनक वापसी और पुनर्वास सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। इसपर अब्दुल्ला ने पूछा, “उन्हें घर लौटने से कौन रोक रहा है? उन्हें अपने पैतृक स्थानों पर लौटना चाहिए और आराम से रहना चाहिए। कई कश्मीरी पंडित ऐसे हैं जिन्होंने घाटी नहीं छोड़ी और अभी भी वहीं रह रहे हैं।”

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल और उत्तराखंड तक, पहाड़ों पर इस साल कम क्यों हुई बर्फबारी

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के बारे में पूछे जाने पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जब वे सत्ता में थे, तो उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया था कि सरकार उनके लिए घर बनाएगी और सभी ज़रूरी सहायता देगी। हालांकि, उनकी सरकार गिरने के बाद, केंद्र को इस प्रस्ताव को लागू करना चाहिए था।

क्या चाहते हैं कश्मीरी पंडित संगठन?

कई कश्मीरी पंडित संगठन चाहते हैं कि सरकार समुदाय की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए कश्मीर घाटी के अंदर उनके लिए एक अलग मातृभूमि बनाए। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए हिंदुओं और मुसलमानों के बीच फूट डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “यह देश सबका है, और इसमें विविधता में एकता है, लेकिन अगर कुछ लोग सांप्रदायिक फूट डालना चाहते हैं, तो उन्हें कौन रोक सकता है?” श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को MBBS कोर्स चलाने की अनुमति वापस लेने का मुद्दा उठाते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू क्षेत्र में नफरत कौन फैला रहा है? पढ़ें क्यों कश्मीरी नेता सज्जाद लोन ने की जम्मू से अलगाव की मांग