जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद राज्य की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल की गई है। जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट की जूवेनाइल जस्टिस कमेटी ने शीर्ष अदालत में दाखिल 55 पन्ने की रिपोर्ट में कहा है कि राज्य में अनुच्छेद 370 हटाने के 5 अक्टूबर के ऐतिहासिक फैसले के बाद से किसी भी बच्चे की मौत नहीं हुई है।

द वायर की खबर के अनुसार इस रिपोर्ट में भारी विसंगतियां हैं। रिपोर्ट में श्रीनगर में 17 साल के लड़के ओसैब अल्ताफ की मौत को भी नकार दिया गया है। जबकि इस तरह की खबरें आई थीं कि अल्ताफ की मौत सुरक्षा बलों की तरफ से पीछा करने के दौरान उसके नदी में कूदने के कारण हुई थी।

श्रीनगर के डीजीपी ने 17 साल के ओसैब अल्ताफ की मौत से इनकार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ओसैब अल्ताफ के मरने की खबर पूरी तरह से आधारहीन है क्योंकि पुलिस प्रशासन के पास इस तरह के मौत की कोई खबर नहीं है। जबकि अल्ताफ के मौत की खबर हफिंगटन पोस्ट में छपी थी।

इसके बाद द वायर और हिंदुस्तान टाइम्स न्यूजपेपर ने इस खबर का फॉलोअप छापा था। 19 अगस्त को एक रिपोर्टर अल्ताफ के परिवारवालों के पास पहुंचा था। अल्ताफ के परिवारवालों ने उसके अंतिम संस्कार का वीडियो फुटेज रिपोर्टर के साथ शेयर किया। अगले दिन इस वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया था।

अल्ताफ के परिवार के अनुसार उनका बेटा अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलने निकला था। पड़ोस में सुरक्षा बलों ने उसका पीछा किया इसके बाद वह नदी में कूद गया जिससे उसकी मौत हो गई। परिवार की तरफ से साझा किए गए वीडियो फुटेज में अल्ताफ के अंतिम संस्कार साफ दिखाई दे रहा है। इसमें अल्ताफ के पिता अपने बेटे की मौत के बारे में बात करते दिखाई दे रहे हैं।

अल्ताफ के पिता का कहना था कि उनके घर में टीवी नहीं है। ऐसे में उन्हें नहीं पता था कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया है। डीजीपी की रिपोर्ट में कश्मीर में किसी भी तरह से बच्चों को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में भी रखने से इनकार किया गया है। डीजीपी ने इस संबंध में करीब आधा दर्जन मीडिया हाउस का नाम लेकर उनकी खबरों की आलोचना की थी।